जैसी जिसकी श्रद्धा, वैसा ही उसका स्वरूप- ज्ञानानंद जी महाराज

शिवकुमार शर्मा
कोटा |

दाधीच गार्डन में जीओ गीता परिवार के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय व्याख्यान के दुसरे दिन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रीमद्भगवत गीता से जीवन प्रबंधन विषय पर गीता के 17 वे अध्याय के तीसरे श्लोक
सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत।
श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्ध: स एव स:।।17ण्3।।
सभी मनुष्यों की श्रद्धा उनके सत्त्व (स्वभाव) संस्कार, के अनुरूप होती है। यह पुरुष श्रद्धामय है, इसलिए जो पुरुष जिस श्रद्धा वाला है वह स्वयं भी वही है अर्थात् जैसी जिसकी श्रद्धा है वैसा ही उसका स्वरूप होता है पर बोलते हुये महाराज श्री ने कहा कि जीवन रूपी गाड़ी को जिस ओर घुमाओंगे गाड़ी उसी दिशामें चल पड़ेगी अर्थात जीवन को जिस सोच के साथ आगे बढ़ायेगें जीवन वैसा ही ढल जायेगा। गीता चिंतन व उपदेश हमारी सोच को सही दिशा देना शुरू कर देगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ अथितियों द्वारा श्री राधाकृष्ण की पूजा अर्चना व गोविंद माहेश्वरी के सुमधुर भजन ‘‘मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है... से हुआ।

अतिथियों में महंत रूद्र गिरी जी महाराज जूना अखाड़ा, महंत सनातन पुरी जी महाराज शिवपुरीधाम थेगड़ा, शैलेंद्र भार्गव महंत गोदावरी धाम, भरत जी महाराज भागवताचार्य, गोविंद माहेश्वरी निदेशक एलन इंस्टीट्यूट, श्रीमती चंद्रकांता मेघवाल विधायक के.पाटन, श्रीमती सुनीता व्यास पूर्व उप महापौर नगर निगम कोटा, सुनील जी गर्ग अध्यक्ष प्रभु प्रेमी संघ कोटा युधिष्ठर सिंह, अशोक वशिष्ठ सचिव भारत विकास परिषद, सत्यनारायण शास्त्री भागवताआचार्य, मोहन कोटवानी सिंधु चिकित्साल के संस्थापक रहे।
स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा की मनुष्यका शरीर पंच तत्वों से बना है पर सभी की सोच अलग-अलग है। हम इस देश में अरबों की संख्या में है सबके चेहरे भी कुछ छोड अलग-अलग है। हर एक में कोई न कोई अन्तर होता ही है। जो अर्जुन व दुर्योधन की सोच में भी रहा। वही उन्होने शिक्षा पर बोलते हुये कहा कि अ से अनार के स्थान पर अ से अर्जुन पढ़ाया जाये तो सब में गीता का ज्ञान जागृत होगा। क्योंकि शिक्षा, न्याय, राजनीति में गीता को जोड़ा जाये तो देश को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक पायेगा। वही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
वही महाराज श्री ने पितृ पक्ष पर प्रकाश डालते हुये कहा कि हमारा भाव परंपरानुसार हमारे पूर्वजों के प्रति होना चाहिये जो उन्होने हमारे लिया किया है, एक दिन अवश्य उनके नाम दानपुण्य करते हुए जुड़ना चाहिए।
कार्यक्रम में इस दौरान मुख्य रूप से अध्यक्ष किशन पाठक सचिव डाक्टर, वेदप्रकाश गुप्ता उपाध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल कोषाध्यक्ष दिनेश जोशी संयुक्त सचिव चिराग भोला, सुरेंद्र अग्रवाल, सदस्य चंद्रशेखर शर्मा, गिरधर बडेरा, गिर्राज खंडेलवाल, रोहित गुप्ता, अनिल चतुर्वेदी रामकृष्ण बागला कन्हैया लाल गुप्ता, संजय मंगल नरेंद्र गुप्ता, अनिल शर्मा, आर एस गुप्ता, चंद्रकांत खंडेलवाल ऋषि शर्मा, नंदा जोशी, रचना पाठक एवं आयोजन समिति से जुड़ी विभिन्न समितियों के सदस्योें सहित श्रद्घालुजन उपस्थित रहे।
कल के कार्यक्रम में
सांय 5 बजे से 7 बजे तक दाधीच गार्डन में व्याख्यान होगा।