जयपुर। शुक्रवार की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आये और किसानों से माफी मांगते हुए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी । और किसानों से माफी मांगते हुए कहा कि अब वे अपने अपने घर जायें, परिवार के पास जायें और खेतों में लौटें । अब हम एक नई शुरूआत करते हैं।
तो क्या मायने हो सकते हैं मोदी सरकार के इन बिलों को अचानक से रद्द करने के..?
संसद में इन बिलों के पास करने के बाद किसान लगभग ढेड़ साल से सड़कों पर आंदोलन कर रहा है। किसानों ने ट्रेक्टर मार्च निकाले, लाल किले पर झण्डा फहराया, और संसद भवन का घेराव भी किया। इन सब के बीच लगभग 700 किसान शहीद भी हुए।
आंदोलनजीवी और खालिस्तानी भी बोला गया
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में आंदोलन कर रहे किसानों को आंदोलन जीवी परजीवी भी बोला वहीं कुछ मीडिया के लोगों और बीजेपी नेताओं ने आतंकवादी और खालिस्तानी की संज्ञा दे दी थी। और अब प्रधानमंत्री ने बिलों को रद्द करने की घोषणा कर दी। बीजेपी मोदी के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक बता रही हैं और कह रही है कि मोदी सरकार ने हमेशा किसानों का भला चाहा है। दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि ये फैसला प्रधानमंत्री मोदी ने चुनावों में हार के डर लिया है।
क्या यूपी चुनाव में हार का डर
प्रधानमंत्री मोंदी ने इन बिलों को वापिस लेने की घोषणा तो कर दी लेकिन, इस आंदोलन के दौरान जिन किसानों की मौत हुई उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा। अगर वास्तव में मोदी सरकार किसानों का हित चाहती तो ये फैसला पहले ही क्यों नहीं ले लिया गया।
हाल ही हुए उपचुनावों में बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा। वहीं किसानों ने भी एलान कर दिया कि वे बीजेपी पार्टी के नेताओं को अपने क्षेत्र में नहीं घुसने देंगे। ऐसे में जरूर बीजेपी को यूपी में हार का डर सता रहा होगा। वहीं मोदी के इस फैसले से विपक्ष के पास से भी एक बडा मुद्दा हाथ से छिन गया। हालांकि ये तो चुनाव होने पर ही पता चलेगा कि क्या किसान बीजेपी सरकार को माफ करेंगे या फिर से सत्ता में लाने में मदद करेंगे। खैर आप सभी की इस पर क्या राय है…