जयपुर। नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा 14 ग्रामीणों के मारे जानें के बाद ग्रामीणों ने असम राइफल्स के कैंप पर हमला बोल दिया इसमें एक जवान भी मारा गया। इसके बाद क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी गई है। इस दौरान 21 पैरा यूनिट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दर्ज की गई एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जानबूझकर नागरिकों पर गोलियां चलाई गई और एक सभी हत्या की गई हैं।
इस घटना के बाद नागालैंड के मोन जिले में एक समय में पांच से अधिक लोगों की सार्वजनिक सभा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, और वाणिज्यिक वाहनों सहित गैर-आवश्यक प्रकृति के सभी वाहनों की आवाजाही को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है।
जिले में अब तक 14 नागरिकों और एक विशेष बल के जवान समेत 15 लोग मारे जा चुके हैं। हत्या का मामला भी दर्ज किया गया है।
जांच के लिए दिये आदेश
नागालैंड सरकार ने घटना की जांच के लिए राज्य पुलिस के पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। मामला क्राइम ब्रांच थाने को ट्रांसफर कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि राज्य के सिग्नेचर हॉर्नबिल फेस्टिवल की सभी गतिविधियां सोमवार रात तक रद्द कर दी गई हैं।
सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना के विशेष बलों को म्यांमार की सीमा से लगे मोन जिले में आतंकवाद रोधी अभियान के लिए तैयार किया गया है। उग्रवादियों की संभावित गतिविधि की सूचना मिलने के बाद उन्होंने शनिवार दोपहर ओटिंग गांव के पास घात लगाकर हमला किया था। पुलिस सूत्रों ने कहा कि लेकिन उन्होंने तिरु-ओटिंग रोड पर एक ट्रक पर गोलियां चला दीं, जो ग्रामीणों को ले जा रहा था। सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा बलों की गोलीबारी में छह ग्रामीणों की मौत हो गई, दो की बाद में अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
इसके तुरंत बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों को घेर लिया। पुलिस सूत्रों ने कहा कि आत्मरक्षा में भीड़ पर गोलीबारी में पांच ग्रामीणों की मौत हो गई और छह घायल हो गए। एक सैनिक की मौत हो गई और सुरक्षा बलों के तीन वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।