जयपुर। शनिवार की सुबह महाराष्ट्र के अमरावती में हिंसा और तोडफोड की घटना सामने आयी। इन घटनाओं के बाद अमरावती शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। उग्र भीड को काबू में करने के लिए स्थानीय पुलिस ने लाठी चार्ज किया लेकिन भीड ज्यादा होने से स्थिति को काबू में नहीं कर पाई। बाद में महाराष्ट्र पुलिस ने भीड़ पर लगाम लगाने के लिए राज्य रिजर्व पुलिस बल की चार कंपनियों और 125 अन्य पुलिसकर्मियों को भेजा।
सुबह करीब 10 बजे, कई समाचार चैनलों ने एक महिला पुलिस अधिकारी सहित पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में दुकानों को तोड़ते हुए भीड़ को दिखाया, जो उन पर लाठीचार्ज करती दिखाई दे रही है। न्यूज चैनलों ने कई वीडियो भी दिखाए जिनमें पुलिस भीड़ को पीछे कर रही है और उन्हें तितर-बितर करने की असफल कोशिश कर रही है।
शहर में धारा 144 लगाने के बाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार दोपहर कहा, हिंसा अमरावती शहर तक सीमित है और स्थिति अब नियंत्रण में है। हमने एसआरपीएफ की चार कंपनियां और 125 पुलिस कर्मियों को भेजा है और जरूरत पड़ने पर और भेजेंगे।
यह था मामला
अमरावती में शुक्रवार दोपहर से हिंसा शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि शनिवार की तोड़फोड़ एक राजनीतिक दल ने की है। और इससे पहले शुक्रवार की घटना को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने शुरू किया था। यहां अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगों ने त्रिपुरा में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कथित हिंसा के विरोध में बिना पुलिस की अनुमति से रैली निकाली। गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने शुक्रवार को हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का वादा किया था और राज्य भाजपा ने हिंसा के विरोध में शनिवार शाम 4 बजे तक अमरावती में बंद का आह्वान किया था।