तीन सरकारें, कई शिलान्यास, बदले ठेकेदार और बढ़ती लागत के बीच आखिर कल को होगा लोकार्पण; सांसद दुष्यंत सिंह करेंगे कई परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास

10 साल की सुस्ती के बाद खुला विकास का ताला! चुनावी साल में याद आया बारां का बहुप्रतीक्षित तेल फैक्ट्री आर ओबी 



विष्णु भारद्वाज ब्यूरो चीफ 


बारां। शहर और जिले के हजारों लोगों का वर्षों पुराना इंतजार आखिर 28 जून को खत्म होने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित तेल फैक्ट्री रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का लोकार्पण रविवार को झालावाड़-बारां सांसद दुष्यंत सिंह करेंगे। यह वही पुल है, जो वर्षों तक राजनीति, प्रशासनिक सुस्ती और ठेकेदारों की अदला-बदली का प्रतीक बना रहा।
शहर में चर्चा है कि जितने समय में यह एक आरओबी बनकर तैयार हुआ, उतने समय में प्रदेश के कई जिलों में दर्जनों पुल बनकर चालू हो गए। इस परियोजना ने तीन सरकारों का कार्यकाल देखा। सबसे पहले इसका शिलान्यास भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार में हुआ, फिर कांग्रेस सरकार के दौरान इसे गति देने के दावे हुए और अब भाजपा सरकार के करीब तीन वर्ष पूरे होने के बाद जाकर इसका लोकार्पण हो रहा है।
निर्माण के दौरान कई बार ठेकेदार बदले गए, महीनों तक काम बंद रहा और परियोजना लगातार देरी का शिकार होती रही। लागत भी प्रारंभिक अनुमान से बढ़ी बताई जा रही है, हालांकि अंतिम आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। वर्षों तक रेलवे फाटक पर जाम झेलने वाले शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अब इस पुल से राहत मिलने की उम्मीद है।
एक दिन में विकास कार्यों की झड़ी
सांसद दुष्यंत सिंह रविवार को जिले में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे।
दोपहर 12 बजे सीसवाली में राजकीय महाविद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण तथा सीसवाली-बारां सड़क के 35 किलोमीटर चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य का उद्घाटन करेंगे।
इसके बाद 2 बजे बारां जिला चिकित्सालय के नवीन भवन का लोकार्पण होगा। 2:30 बजे तेल फैक्ट्री परिसर में आरओबी (एलसी-38) का लोकार्पण किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में राजकीय कन्या छात्रावास का शिलान्यास तथा बारां-मांगरोल स्टेट हाईवे-1 निर्माण कार्य की आधारशिला भी रखी जाएगी।
शाम 4 बजे जलवाड़ा में एनएच-72 पर पार्वती नदी पर निर्मित उच्च स्तरीय पुल का लोकार्पण किया जाएगा।
अब उठ रहे हैं सवाल भी
आरओबी के लोकार्पण से लोगों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन शहर में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि परियोजना समय पर पूरी होती तो वर्षों तक लोगों को जाम, दुर्घटनाओं और परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा है कि विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास ऐसे समय हो रहे हैं, जब प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।
फिलहाल, वर्षों से अधूरे पड़े इस पुल का इंतजार समाप्त होने जा रहा है और बारांवासियों को उम्मीद है कि अब उन्हें रेलवे फाटक पर लंबी कतारों और घंटों के जाम से स्थायी राहत मिलेगी।