गढ़चिरौली मुठभेड़ में घायल जांबजों की दास्तां, खून निकलता रहा फिर भी लडते रहे और 26 माओवादियों को ठोक दिया

जयपुर। शनिवार को गढ़चिरौली में माओवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में हमारी सेना के कंमाडोज ने 26 माओवादियों को मौत के घाट उतार दिया। इस मुठभेड में हमारे कईं जांबज घायल भी हो गये जिन्होंने इस मुठभेड का आंखो देखा हाल बताया। कमांडो द्वारा सूनाये ये वृतांत को महसूस करके ऐसा लगता है मानो एक फिल्मी स्टोरी हो, लेकिन यह असल स्टोरी थी जो हमें अक्सर रील लाइफ में दिखाई देती हैं। घायल कंमाडों के सिर से खून बह रहा था, घुटने में बुरी तरह से चोट लेकिन लडते रहे और माओवादियों को ठिकाने लगा दिया।

इस मुठभेड में घायल हुए कंमाडों 42 वर्षीय रवींद्र नैतम जो कि एक एंकाउटंर स्पेशलिस्ट हैं। ​रवींद्र ने 2006 से लेकर अब तक वह 75 से ज्यादा माओवादियों को मारने की टीम का हिस्सा रहे हैं। वहीं एक और जांबाज गढ़चिरौली की सी-60 कमांडो यूनिट के रवींद्र भी हैं, इस मुठभेड में उनके गोली उनके सिर छू कर निकल गई, उनके सिर के खून निकल रह था, और मौत सामने थी लेकिन हिम्मत नहीं हारी, रविंद्र ने सिर के तौलिया लपेटकर 10 घंटे तक माओवादियों से लड़ते रहे । फिलहाल कमांडो रवींद्र नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती हैं।

एक और अन्य जांबाज जिनका नाम है— अतराम। अताराम इस ​मुठभेड में रविंद्र के सहयोगी थे। अताराम को एक चट्टान से टकरा गये और 10 फीट नीचे जा गिरे जिससे उनके घुटने में गंभीर चोट आ गई। अतराम भी अबतक 70 से अधिक माओवादीयों को मारने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।
सुन्न दर्द के बावजूद, अतराम ने माओवादियों को दूर रखने के लिए सुबह 7 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लड़ाई लड़ी थी। कमांडो ने कहा, 'जब सवाल जीवन और मृत्यु के बारे में होता है, तो दर्द का एहसास होना खत्म हो जाता है।