जयपुर। रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है। आज इस जंग को 151 दिन हो गये हैं। रूस ने यूक्रेन को बरबाद कर दिया है। यूक्रेन के शहरों को रूस ने अपनी मिसाइल और गोलों से खंडहर में तब्दील कर दिया है। हालांकि, इस सब के बीच यूक्रेन हार मानने को तैयार नहीं है। लेकिन इस युद्ध को रोकने की एक उम्मीद तुर्की से की जा रही है। क्योंकि हाल ही रूस और यूक्रेन के बीच एक मुद्दे को लेकर समझौता हुआ है। और इस समझौते में तुर्की की खास भूमिका रही है। रूस और यूक्रेन के बीच मिरर समझौता हुआ जिसके तहत अब खाद्यान्नों का देश कहे जाने वाला यूक्रेन काला सागर के जरिए अनाज का निर्यात कर सकेगा। दोनों देशों के बीच इस समझौते को युद्ध विराम की एक उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मामलों के जानकार प्रो हर्ष वी पंत बताते हैं कि तुर्की ने मिरर समझौते में एक सकारात्म भूमिका अदा की है। इसलिए कह सकते हैं कि दोनों देशों के बीच चले आ रहे इस यूद्ध को खत्म करने में तुर्की अपनी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। बता दें कि तुर्की नाटो समूह का सदस्य है लेकिन वह अमेरिका के कहे अनुसार नहीं चलता है। तुर्की दोनों देशों के बीच शांति चाहता है और वह बिना किसी अन्य देश के दबाव में यह कर सकता है।
क्या है अमेरिका की नीयत
प्रो. वी पंत बताते हैं कि युक्रेन और रूस के मध्य युद्ध पर अमेरिका की नीयत साफ नजर आ रही है। अमेरिका चाहता है कि ये युद्ध और भी लंबा खिंचे ताकि उसके विरोधी और पावर में समकक्ष रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो। याद रहे दोनों देशों के मध्य इस युद्ध में अकेले युक्रेन को ही नहीं बल्कि रूस को बडा नुकसान हो रहा है। साथ ही युद्ध में युरोपीय देश भी उलझे हुए हैं। और अमेरिका के लिए इससे अच्छी खबर नहीं हो सकती। क्योंकि अमेरिका अच्छी तरह से जानता है कि यूरोपिय देश किसी भी मामले में अमेरिका में पीछे नहीं रह रहे हैं। अमेरिका को रूस से अपनी बादशाहत का खतरा है और वह चाहता है कि युद्ध खत्म ही ना हो और रूस को ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो।