स्वास्थ्य, पोषण, लैंगिक समानता संबंधी कार्यशाला आयोजित
स्वास्थ्य, पोषण, लैंगिक समानता संबंधी कार्यशाला आयोजित
कार्यशाला में पंचायती राज संस्थाओं की भागीदारी पर हुई चर्चा
ब्यूरो चीफ शिवकुमार शर्मा
बारां कोटा संभाग
बारां, 14 दिसंबर। जिला प्रशासन एवं एक्शन अगंेस्ट हंगर संस्था द्वारा पंचायतीराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के साथ सतत विकास के लक्ष्यों स्वास्थ्य, पोषण, लैंगिक समानता के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कुपोषण की समाप्ति एवं सुपोषण के लिए जागरूकता के संबंध में चर्चा की गई।
एक्शन अगेंस्ट हंगर की दीपाली भटटाचार्य एवं अकांक्षा पाण्डेय ने पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि बारां जिले में कुपोषण एक बडी समस्या है, जिसके कई कारणों में से एक मुख्य कारण है समुदाय में जागरुकता एवं स्वामित्व का अभाव। यदि समुदाय स्वयं जागरुक हो जाए एवं पोषण सुरक्षा संबंधी अपनी आवश्यकताओं को समझने लगे तो कुपोषण को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद कृष्णा शुक्ला ने कहा कि ‘पोषित पंचायतों के गठन से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक मदद मिल सकती है। इसलिए इसमें विशेषकर महिला सरपंचों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है‘। उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास भावना शर्मा ने कहा कि एक्शन अगेंस्ट हंगर ‘संस्था पिछले कई वर्षों से जिले के चुने हुए गांवों में आंगनबाड़ी की मदद से कुपोषित बच्चों के साथ काम कर रही है। संस्था की यह नई पहल जिसमें पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के साथ काम कर उन्हें ‘कुपोषण मुक्त पंचायत‘ के लिए प्रेरित करना समय की मांग है। पंचायतों की भूमिका मजबूत किए बिना यह काम नहीं किया जा सकता‘।
कार्यशाला को बाल विकास परियोजना अधिकारी किशनगंज-शाहबाद ब्लॉक रवि मित्तल व बारां ब्लॉक मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी अरविंद नागर ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन एक्शन अगेंस्ट हंगर के सुनीत कुमार मधुर ने किया। कार्यशाला में एपीआरओ राहुल आसीवाल, जिला समन्वयक पोषण अभियान पवित्रा नागर, सहायक प्रशासनिक अधिकारी हरिप्रकाश शर्मा, एक्शन अगेंस्ट हंगर से नूरजहां खातून, सचिन शर्मा, प्रतुल यादव, जीतेन्द्र पाण्डेय, अभिषेक साहु, विनोद कुमार, बृजमोहन वर्मा व वीरेन्द्र बैरवा मुख्य रूप से उपस्थित रहेे।
कार्यशाला के आयोजन का उददेश्य एस.डी.जी के स्थानीयकरण में पोषण के मुद्दे को सुदृढ करना, पंचायती राज्य सदस्यों खास तौर पर महिला सरपंचों के साथ चर्चा कर संबंधित विषय पर एक आम राय कायम करना, लैंगिक असमानता एवं महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा से महिला समेत परिवार के स्वास्थ्य एवं पोषण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में समझ का विकास करना एवं पोषण से जुड़े मुद्दों को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्राम पंचायत विकास योजना में जोडने हेतु रोड़ मैप का विकास करना है।