जयपुर। आज सुप्रीम कोर्ट ने सेना को 11 महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन जारी करने के आदेश दिया हैं। यह मलिहा अधिकारियों की बड़ी जीत है। केंद्र ने कहा है कि वह 10 दिनों के भीतर 11 और अधिकारियों को स्थायी कमीशन जारी करेगा, जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने आज एक फैसले में केंद्र को उन सभी अधिकारियों को 3 सप्ताह के भीतर स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया, जो अभी तक अदालत से संपर्क नहीं कर पाए हैं, लेकिन पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेना को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराने की चेतावनी के बाद केंद्र ने नरमी बरती है। बता दें कि इस साल अगस्त में स्थायी कमीशन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट गए थे, जिसमें कोर्ट के मार्च 2021 के फैसले का पालन नहीं करने के लिए रक्षा मंत्रालय के खिलाफ अवमानना कार्यवाही की मांग की गई थी। सेना को "निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाली सभी महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों (डब्लूएसएससीओ) को स्थायी कमीशन देने के लिए" निर्देशित किया गया था। कोर्ट ने इस कवायद को पूरा करने के लिए सरकार को तीन महीने का समय दिया था।
22 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 39 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन जारी करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने चेतावनी दी थी, हम सेना को अवमानना का दोषी ठहराएंगे। मैं आपको सतर्क कर रहा हूं। उन्होंने कहा, सेना अपने अधिकार में सर्वोच्च हो सकती है लेकिन देश की संवैधानिक अदालत अपने अधिकार क्षेत्र में सर्वोच्च है।
एक स्थायी कमीशन का अर्थ है सेना में सेवानिवृत्ति तक कैरियर, जबकि शॉर्ट सर्विस कमीशन 10 साल के लिए है, जिसमें 10 साल के अंत में स्थायी कमीशन छोड़ने या चुनने का विकल्प होता है। यदि किसी अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं मिलता है तो अधिकारी चार साल का विस्तार चुन सकता है।