म्यांमार में उग्रवादियों को पाल रहा चीन, पूर्वोत्तर में दहशत ​फैलाने की फिराक में ड्रैगन

जयपुर। हाल ही मणिपुर में असम राइफल्स के जत्थे पर हुए उग्रवादी हमले में एक कर्नल व उसके परिवार सहित 7 लोग शहीद हो गये थे। इस हमले के पीछे चीन का खेल नजर आ रहा है। सुरक्षा ऐजेंसियों इन उग्रवादियों पर अब कडी नजर रखनी शुरू कर दी है। और सभी सुरक्षा ऐजेंसी अलर्ट मोड पर है।
म्यांमार में सक्रिय गिरोह
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हमला करने वाले आतंकि म्यांमार से आये थे और हमला करके भाग गये। बताया जा रहा है कि म्यांमार में इस समय पर 20 से आधिक आतंकियों का गिरोह सक्रिय है और इन सभी को चीन की तरफ से हथियार और फंडिंग की जा रही है। वहीं एजेंसियों को आशंका है कि चीन की मदद से उग्रवादी संगठन नए सिरे से गतिविधि शुरू कर सकते हैं। म्यांमार में कई उग्रवादी गुटों के कैंप हैं, जो पूर्वोत्तर में हिंसा की साजिश रचते हैं। इसके अलावा इनका चीनी कनेक्शन भी काफी मजबूत है।
वियतनाम से व्यापार बढ़ाने पर भी चीन ने दी थी धमकी
इससे पहले चीन भारत को अपने व्यापारिक भागीदारी को लेकर भी धमकी दे चुका है। भारत ने वियतनाम के साथ व्यापार करना शुरू कर दिया जिसको लेकर ड्रैगन बौखला गया और भारत को परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। माना जा रहा है कि यह भी एक कारण जिससे चीन भारत के पूर्वोत्तर में दशहत फैलाना चाहता है।
सूत्रों के मिली खबर के मुताबिक मणिपुर में पीएलए का संपर्क चीन से है और आशंका है कि कुछ संगठनों ने म्यांमार से हटकर दक्षिण चीन के इलाके में ठिकाना बनाया है। मणिपुर में पीएलए का चीन से मजबूत संपर्क है। इसके अलावा कई अन्य गुट भी चीनी सेना के संपर्क में बताए जाते हैं। यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम-इंडिपेंडेंट के प्रमुख ने म्यांमार की सीमा से सटे दक्षिणी चीन के रुइली में नया ठिकाना बनाया था। उग्रवादी संगठन का ऑपरेशनल बेस और प्रशिक्षण शिविर म्यांमार के सागैंग सब-डिवीजन में है।