शिवकुमार शर्मा
कोटा |
कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा बुधवार को सुल्तानपुर में बुधवार को किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें क्षेत्र के किसानों ने भाग लिया।
किसान सम्मेलन में पीपल्दा विधायक रामनारायण मीणा ने किसानों से द्वितीय पीली क्रान्ति लाने का आव्हान करते हुए कहा कि देश में प्रतिवर्ष 60-70 हजार करोड़ रूपये का खाद्य तेल आयात किया जाता है। खाद्य तेल के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने तथा उपभोगताओं को उचित दर पर उच्च गुणवत्ता का खाद्य तेल उपलब्ध कराने के लिए आगामी रबी मौसम में किसान सरसों की फसल ज्यादा से ज्यादा लगाये। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर जिले में सरसों के उत्पादन को बढ़ाये तथा मधुमक्खी पालन कर सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकते है। उन्होंने गाय पालन एवं ऑर्गेनिक फार्मिग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कृषि विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. डीसी जोशी ने बताया कि किसान सरसों की नवीन किस्मों के उन्नत बीज एवं प्रौघोगिकी को अपनाकर प्रति एकड़ सरसों का अधिक उत्पादन ले सकते हैं। सरसों के उच्च गुणवत्ता के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र पर ऑयलसीड़ हब की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि हमें किसानों की आय में बढ़ोत्तरी के लिए फसल विविधिकरण को अपनाना होगा, फसलों के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन, मधुमक्खीपालन, खाद्य प्रसंस्करण पर भी जोर देना होगा तथा युवाओं को कृषि उद्यमी बनाना होगा।
निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसके जैन ने बताया कि विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसानों को कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण आदि की नई प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर उनकी आय में बढ़ोत्तरी के लिए प्रयासरत है। उप खण्ड अधिकारी दीगोद पुष्पा हरवानी ने प्रशासन गांव के संग अभियान में अधिक से अधिक किसानों के भाग लेने के बारे में बताया।
संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. रामवतार शर्मा ने गेंहू की अपेक्षा चना, सरसों, धनियां की फसलों को सम्भाग में बढ़ावा देने, संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. पीके गुप्ता ने बागवानी को बढ़ावा देने, जिला विस्तार अधिकारी सीएडी डॉ. तनोज चौधरी ने नहरी पानी के समुचित उपयोग, आनन्दी लाल मीणा ने सूक्ष्म सिचाई प्रणाली को अपनाने की जानकारी दी।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र सिंह ने बताया कि किसान सम्मेलन का आयोजन आगामी रबी में लगायी जाने वाली फसलों की कार्य योजना बनाने के लिए किया गया है। जिले के किसानों, अनुसंधान वैज्ञानिकों एवं प्रसार कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से जिले में कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर कृषि अनुसंधान केन्द्र उम्मेदगंज के वैज्ञानिक डॉ. बीएस मीणा ने आर्गेनिक फार्मिग, डॉ. एचपी मेघवाल ने मधुमक्खीपालन, डॉ. राजेन्द्र यादव ने भूमि की जांच के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग, डॉ. डीएल यादव ने बीज बुवाई से पूर्व बीजोपचार एवं सीएफसीएल के जगमोहन सैनी ने सूक्ष्म तत्वों के उपयोग की जानकारी दी।
सम्मेलन में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. रामराज मीणा ने संरक्षित सब्जी उत्पादन, डॉ. राकेश कुमार बैरवा ने नई किस्मों के बीज का उपयोग, गुन्जन सनाढय ने खाद्य प्रसंस्करण एवं पोषण, डॉ. रूपसिंह ने मशरूम उत्पादन, मुकेश चौधरी ने केन्द्र पर उपलब्ध बीज की जानकारी दी। किसान सम्मेलन में कृषि विश्वविद्यालय द्वारा खाद्य प्रसंस्करण, मधुमक्खीपालन, आर्गेनिक फार्मिग आदि पर कृषि प्रदर्शनी लगायी तथा कृषि प्रश्नोत्तरी में भाग लेने वाले किसानों को पुरस्कृत किया गया।