Mahatma Gandhi: हर साल 2 अक्टूबर को पूरे देश में महात्मा गांधी यानी मोहनदास करमचंद गांधी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी को पूरा देश प्यार से बापू के नाम से पुकारता है। स्कूलों में बच्चों को बापू के अहिंसा और सत्य के आदर्शों का पालन करने के महत्व के बारे में भी बताया जाता है, ताकि वे भविष्य में अच्छे इंसान बन सकें। देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में न सिर्फ बापू की अहम भूमिका रही, बल्कि उनका पूरा जीवन एक सीख की तरह रहा, अगर उनके हिस्से पर अमल किया जाए तो इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकती है। महात्मा गांधी के विचारों और उनके लेखन का लोगों के जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ा। आइए जानते हैं आज बापू के जन्मदिन पर इनमें से 5 चीजें बच्चों को सिखाई जा सकती हैं।
महात्मा गांधी के जीवन से सीख -
अहिंसा: अहिंसा परमो धर्म के अवधारणा का पालन करने वाले गांधी का मानना था कि अहिंसा कोई समाधान नहीं दे सकती। लेकिन आज के बच्चे छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा हो जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चे को समझाना चाहिए कि स्कूल के आसपास या घर में अगर आपकी किसी दोस्त से कोई बहस हो जाए तो गांधीजी की तरह अहिंसा से सुलझाने का प्रयास करें। ऐसे ही शांति हो सकती है।
कुछ भी मुश्किल नहीं है: यदि व्यक्ति जीवन में कुछ करने के लिए दृढ़ है, चाहे कुछ भी हो, उसे अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। यह एक व्यक्ति की दृढ़ता है जो उसे सभी कठिनाइयों से लड़ने और दूर करने की शक्ति देती है। यह रवैया गांधीजी के कई आंदोलनों में भी पाया जाता है।
सत्यः झूठ और छल से दूर रहना ही उत्तम है। बापू सत्य की शक्ति में विश्वास करते हैं। वहीं, हमारे समय में बच्चे अक्सर झूठ बोलते हैं। बच्चों को हमेशा अपनी गलतियों को स्वीकार करना सिखाया जाना चाहिए। साथ ही माता-पिता को अपने बच्चों को यह भी बताना चाहिए कि सच बोलने की इच्छा रखने से रिश्ते फिर से स्वस्थ हो सकते हैं।
सादा जीवन, उच्च विचार: महात्मा गांधी एक साधारण व्यक्ति थे। उनके पास जो कुछ था उससे वे संतुष्ट और खुश थे। माता-पिता को अपने बच्चों को इस तथ्य पर जोर देना चाहिए कि मानवीय संबंध अक्सर हमारी सबसे बड़ी खुशी का स्रोत होते हैं। इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महात्मा गांधी का आदर्श वाक्य 'सादा जीवन, उच्च विचार' था।
बराबरी: गांधी जी कभी किसी को जात-पात से तोलकर नहीं देखते थे, उनके लिए हर व्यक्ति बराबर था। हमें भी अपने बच्चों को भेदभाव का नहीं बल्कि बराबरी का पाठ पढ़ाना चाहिए ।