जयपुर। भारत को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आज सुप्रीम कोर्ट में नौ नये न्यायधाीशों का शपथ दिलाई। जिसमें एक महिला न्ययाशीध बीवी नागरत्ना हैं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और आठ अन्य की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय में मंजूरी के बाद अब बीवी नागरत्ना का 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय इतिहास में अभी तक कोई भी महिला जज मुख्य न्यायधीश नहीं बनी है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के द्वारा नये नौ न्यायाधीशों के बाद शपथ, सुप्रीम कोर्ट में अब न्यायशीधों की संख्या 33 हो जायेगीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में केवल एक न्यायशाीध की जगह खाली रहेगी।
न्यायमूर्ति नागरत्ना वर्तमान में कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीश हैं, और उन तीन महिला न्यायाधीशों में शामिल हैं जिनके नामों को गुरुवार को राष्ट्रपति ने मंजूरी दी थी। दो अन्य महिला न्यायाधीश हैं जिनमें तेलंगाना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश हिमा कोहली और गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी शामिल हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में केवल एकमात्र महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी हैं, जो 2022 में सेवानिवृत्त होने वाली हैं।
पदोन्नति के लिए अनुशंसित अन्य नामों में कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अभय ओका, गुजरात न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ, सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेके माहेश्वरी, केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश शामिल थे।
बता दें कि जस्टिस नागरत्ना, जिन्होंने बेंगलुरु में एक वकील के रूप में शुरुआत की, अपने परिवार में दूसरे CJI होंगे, क्योंकि उनके पिता, ES वेंकटरमैया, 1989 में लगभग छह महीने के लिए CJI थे।