किसानों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सड़क जाम नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

जयपुर। केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान पिछले लगभग एक साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने हरियाणा सिंघु बॉर्डर को अनिश्चितकाल के लिए रोड को जाम कर रखा है। आज शीर्ष अदालत ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली और अन्य जगहों पर लगभग एक साल तक चले आंदोलन का नेतृत्व करने वाले किसान संघों को सड़कों से प्रदर्शनकारियों को हटाने की मांग वाली याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन वे अनिश्चित काल के लिए सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते।
बता दें कि नोएडा के एक निवासी द्वारा यह याचिका दायर की गई थी जिसमें जिसमें प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास की सड़कों से हटाने का आग्रह किया गया था। अदालत ने कहा कि कोई न कोई समाधान निकालना ही होगा। हम कानूनी चुनौती लंबित होने पर भी विरोध करने के उनके अधिकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है।

याचिक की सुनवाई कर रही पीठ के अध्यक्ष जस्टिस एस के कौल ने कहा कि इस समस्या का निवारण न्यायिक रूप, आंदोलन या संसदीय बहस के माध्यम से हो सकता है। लेकिन राजमार्गों को इस तरह रोकने से कैसे किया जा सकता है।