महाराणा प्रताप व्याख्यान माला एवं सम्मान समारोह आयोजित

संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा राजस्थान|

वीर शिरोमणि को स्मरण कर श्रद्धांजलि दी
बाल,युवा एवं साहित्य पुरस्कार से सम्मानित

आजादी की अमृत महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत शौर्य एवं पराक्रम की प्रतिमूर्ति महाराणा प्रताप की 482वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय के सभागार में महाराणा प्रताप व्याख्यान माला एवं सम्मान समारोह आयोजित
कर वीर शिरोमणि को स्मरण कर श्रद्धांजलि दी गई। पुस्तकालय प्रशासन की ओर से मास्टर प्रांशु अग्रवाल को महाराणा प्रताप बाल पुरस्कार, राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ साहित्यकार किशन लाल वर्मा को महाराणा प्रताप साहित्य पुरस्कार एवं महाराणा प्रताप विचारक एवं प्रेरक उधबोधक चंद्र शेखर सिंह शिशोधिया को महाराणा प्रताप युवा पुरस्कार से
प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रांशु द्वारा महाराणा प्रताप पर बनाई उनकी 75 पेंटिंग का लोकार्पण किया गया। प्रारम्भ में अतिथियों ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना की।
वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त कर कहा कि
महाराणा प्रताप स्वाभिमानी शासक थे जिन्होंने मुगलों की दास्तां स्वीकार करने की जगह जंगलों में रह कर घास की रोटी खाना मंजूर किया। उन्होंने स्वाभिमान को सर्वोपरी रखा। हल्दी घाटी का युद्ध भारतीय इतिहास में अमर बन गया जहां राणा ने अपनी सीमित भील फौज के साथ मुगलों की ओर से मानसिंह से कड़ा संघर्ष किया। वीर शिरोमणि प्रताप अपने स्वाभिमान की वजह से इतिहास में अमर हो गए।
मुख्य वक्ता किशन लाल वर्मा,चंद्र शेखर सिंह सिसोदिया, से. नि. उप.मुख्य अभियंता, कोटा थर्मल, मोदी स्कूल की ड्राइंग
टीचर् अनुपमा पंवार, पुस्तकालय प्रभारी डॉ.,दीपक श्रीवास्तव एवं कार्यक्रम अध्यक्ष लेखिका श्रीमती शिखा अग्रवाल ने महाराणा प्रताप के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धांजलि दी। शशि जैन, श्रीनाथ शर्मा,आकाश मिश्रा एवं हेमलता सोनी ने प्रताप के जीवन पर आधारित कविता पाठ किया।