टूटी-फूटी सड़कों पर काली गिट्टी जैसा टाट का पैबंद लगाकर प्रशासन की इतिश्री: मीणा
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ना जिला प्रशासन और ना ही जनप्रतिनिधि का ध्यान : विजय
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सिविल लाइंस जैसे पौश इलाके सहित शहर में कई बस्तियों में घुप्प अंधेरा : शर्मा
विष्णु भारद्वाज
बारां 1 अगस्त | जिला मुख्यालय सहित समूचे जिले में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए आम आदमी दर दर भटक कर गुहार लगाते लगाते थक चुका है परंतु जिला प्रशासन है कि उसके कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है और तो और सत्तासीन जनप्रतिनिधि भी नकारा साबित हो चुके हैं| भाजपा ने कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर उक्त आरोप लगाया है और कहा कि आश्चर्य की बात तो यह है कि मुख्यालय सहित जिले के अधिकांशत इलाकों की सड़कें दयनीय हालत में ही नहीं अपितु बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील होकर अत्यंत जर्जर हो चुकी है|
भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश मीणा ने कहा कि कांग्रेस सरकार एवं उसके अधीनस्थ जनप्रतिनिधि तथा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जनता से जुड़ी मूलभूत समस्याओं को प्रारंभ से ही अनदेखा किया गया है | मीणा ने कहा कि इन दिनों कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों के इशारों पर प्रशासन द्वारा टूटी-फूटी सड़कों पर काली गिट्टी बिछाकर "टाट के पैबंद" जैसी कार्रवाई कर इतिश्री की जा रही है जिस पर खास तौर पर दुपहिया वाहन चालकों को परेशानी ही नहीं हो रही बल्कि गिट्टी पर टायर फिसल जाने से चोटिल होने का खतरा भी बढ़ गया हैं|
पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश विजय ने कहा कि शहर की सभी सड़कें अत्यंत जर्जर अवस्था में आज से नहीं बल्कि पिछले कई महीनों और वर्षों से है| जिन्हें दुरुस्त कराने के लिए ना तो प्रशासन का ध्यान और ना ही सरकार के जनप्रतिनिधियों का,,, कई बार इन्हीं बड़े-बड़े गड्ढों के कारण गंभीर दुर्घटनाएं घटित होकर जाने भी जा चुकी है|
भाजपा मीडिया विभाग के जिला प्रमुख राजेंद्र शर्मा ने बताया कि जब कोटा रोड स्थित शहर की पौश कॉलोनी सिविल लाइंस में ही हालात दयनीय ही नहीं बल्कि बद से बदतर हो गए हैं जहां पर न तो सड़कें सही है और ना ही बिजली की व्यवस्था परिपूर्ण है , उन्होंने बताया कि सिविल लाइंस में जिले के सभी आला अधिकारी निवास करते हैं जिन्हें शायद मूलभूत सुविधाओं को दुरस्त कराने का ध्यान ही नहीं है वह इन्हीं टूटी-फूटी सड़कों से घुप्प अंधेरे में मजे से अपने चार पहिया वाहनों में सफर करते हैं लेकिन उन्हें इस बात का ध्यान कतई नहीं रहता कि यहां की सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों से युक्त है और सड़क किनारे लगी लाइटें बंद पड़ी है|
पूर्व चेयरमैन यशभानु जैन एवं रामस्वरूप यादव ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत शहर की सभी मूलभूत सुविधाओं को मध्य नजर रखते हुए लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करवाना दायित्व रहता है किंतु यहां पर स्थिति अत्यंत दयनीय नजर आ रही है जहां पर ना तो सड़कों के सुदृढ़ीकरण के कार्य हो रहे हैं और ना ही सड़क किनारे लगी लाइटों को ठीक किया जा रहा है बल्कि कई जगह तो नालियों में अभी भी गंदगी अटी पड़ी हुई है| कई खाली पड़े भूखंडों में वर्षा जनित पानी भरा होकर सड़ांध मार रहा है जिससे बीमारियां पनपने का अंदेशा भी बन गया है| वरिष्ठता प्रेम नारायण गालव एवं पूर्व जिला प्रमुख नंदलाल सुमन ने कहा कि सड़कों अत्यंत दयनीय अवस्था तथा उन पर पड़े बड़े-बड़े गड्ढों के चलते जहां एक और दुर्घटनाएं घटित हो रही है वहीं दूसरी ओर लोगों को उड़ते धूल के गुबार से श्वास लेने में भी परेशानी हो रही है| आम आदमी की इस प्रकार की शिकायतों को लेकर भारतीय जनता पार्टी द्वारा कई बार जिला प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है किंतु प्रशासन द्वारा अभी तक भी कोई पुख्ता व्यवस्था को अमलीजामा नहीं पहनाया है| केवल इतिश्री करने हेतु टूटी-फूटी सड़कों पर काली गिट्टी फैलाकर अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण कर आमजन को बेवकूफ बनाया जा रहा है| भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष हेमराज मीणा ने कहा कि सरकारी नुमाइंदे कांग्रेस के नेताओं को इशारों पर जानबूझकर आमजन के साथ कुठाराघात कर रहे हैं| जबकि जिला मुख्यालय सहित समूचे जिलों की सड़कों के हालात आमजन से छुपे हुए नहीं है जिनके कई बार निविदाएं हुई एवं टेंडर हुए परंतु कार्य को आज तक भी प्रारंभ नहीं किया गया क्योंकि इसके पीछे भी बड़ा गोलमाल है| उन्होंने कहा कि अब अधिकारी वर्षा का बहाना लगाकर कह रहे हैं कि बारिश के बात सड़कों का दुरुस्ती कारण करवाया जाएगा|
भाजपा मीडिया विभाग के जिला प्रमुख राजेंद्र शर्मा एवं शहर प्रवक्ता सचिन सनाढ्य ने बताया कि सड़क पानी बिजली से संबंधित अव्यवस्थाओं को लेकर शहर अध्यक्ष महावीर नामा एवं नगर परिषद के प्रतिपक्ष के नेता दिलीप शाक्यवाल की अगुवाई में पहले भी पुरजोर ढंग से आंदोलन किया गया है | इन दोनों नेताओं ने पुणे नगर परिषद एवं जिला प्रशासन को आगाह किया है कि यदि शीघ्र ही मूलभूत समस्याओं का निराकरण उचित ढंग से नहीं किया गया तो आंदोलन करना उनकी मजबूरी हो जाएगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी