प्राइवेट स्कूल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा जिला कलेक्टर को संयुक्त निदेशक और मुख्यमंत्री के नाम दिया ज्ञापन

बूंदी 28 फरवरी । प्राइवेट स्कूल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश की पालना करते हुए RTE का समस्त बकाया भुगतान गैर-सरकारी विद्यालयों  को तत्काल प्रभाव से दिलवाने  एवं प्राइवेट स्कूलों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने, उनकी समस्याओं के समाधान किए जाने  को लेकर जिला कलेक्टर को संयुक्त निदेशक और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।

 
जिला प्रवक्ता अशोक जायसवाल ने बताया कि राज्य में 40हजार से अधिक गैर-सरकारी विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 90 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं तथा 7 लाख से अधिक कार्मिक कार्यरत हैं। देश की स्वाधीनता के बाद से ही राज्य की स्कूल शिक्षा में गैर-सरकारी विद्यालयों की सराहनीय एवं अग्रणी भूमिका रही है। राज्य के आर्थिक विकास एवं रोजगार उपलब्ध करवाने में भी इन विद्यालयों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
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पिछले कुछ वर्षों से गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ भेद-भावपूर्ण व्यवहार एवं उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप इन विद्यालय के संचालकों, शिक्षकों एवं अभिभावकों में असंतोष उत्पन्न हो रहा है।
    
जिलाध्यक्ष कविता जैन ने कहा कि  वर्तमान राज्य सरकार को निम्नांकित समस्याओं से अवगत कराते हुए उम्मीद करते हैं कि सरकार निष्पक्ष एवं सद्भावनापूर्ण व्यवहार करते हुए इन समस्याओं का शीघ्र समाधान उपलब्ध करवाएगी।

निदेशालय प्रारम्भिक शिक्षा, राज. बीकानेर के आदेश दिनांक 21.02.2024 के अनुसार राज्य के सभी गैर-सरकारी विद्यालयों की 21 प्रकार की जांच की जाएगी तथा किसी दस्तावेज के उपलब्ध न होने पर तत्काल मान्यता समाप्ति की कार्यवाही की जाएगी।

• निदेशालय ने अपने पत्र में इस कार्यवाही को सरकार की 100 दिवसीय कार्य योजना का हिस्सा बताया है जबकि निदेशालय का यह बताना स्पष्ट रूप से गलत एवं भ्रामक है।

• वर्तमान में विद्यालयों में बोर्ड एवं स्थानीय परीक्षा चल रही हैं या परीक्षा की तैयारी चल रही है। ऐसे अवसर पर सभी गैर-सरकारी विद्यालयों की 21 प्रकार की जांच कराना कैसे सही हो सकता है।

• कुछ समय पूर्व ही आर.टी.ई. के तहत नि:शुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की जांच के दौरान सभी विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया गया है, फिर अचानक परीक्षा के अवसर पर सभी गैर-सरकारी विद्यालयों की पुनः जांच करवाना इन विद्यालयों के प्रति निदेशालय की दुर्भावना को दर्शाता है।

• विद्यालयों के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शिक्षकों की योग्यता के मापदंड सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में समान रूप से लागू हैं (आर.टी.ई. अधिनियम की धारा-18,19 एवं अनुसूची  तथा धारा-23), फिर केवल गैर-सरकारी विद्यालयों की जांच करवाना तथा सरकारी विद्यालयों को छोड़ देना कैसे न्यायोचित हो सकता ह? जबकि यह तथ्य भी सर्वविदित है कि बहुत से सरकारी विद्यालय इंफ्रास्ट्रक्चर के न्यूनतम मानक भी पूरे नहीं करते और उनका संचालन करना आर.टी.ई. अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।

• जांच के कुछ बिन्दु गैर-सरकारी विद्यालयों की स्वायत्तता का उल्लंघन करते हैं, जबकि संविधान एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णयों में गैर-सरकारी विद्यालयों को काफी हद तक स्वायत्तता दी गई है।    

2)  नि:शुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण समय पर नहीं किया जाना।
आर.टी.ई. अधिनियन  2009 के नियम-11 के अनुसार गैर-सरकारी विद्यालयों में प्रवेक्षित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण सरकार द्वारा प्रतिवर्ष अक्टूबर (प्रथम किस्त) एवं जून (द्वितीय किस्त) माह  में किया जाना आवश्यक है।

• शैक्षिक सत्र 2023-24 की किसी भी किस्त का कोई भुगतान गैर-सरकारी विद्यालयों को आज  तक प्राप्त नहीं हुआ है।

• शैक्षिक सत्र 2022-23 की द्वितीय किस्त काफी विद्यालयों की बकाया है जबकि कुछ विद्यालयों को प्रथम किस्त का भुगतान भी नहीं मिला है।

• कुछ विद्यालयों की 2019-20, 2020-21 एवं 2021-22 की फीस का पुनर्भरण भी बकाया है। जबकि  राजस्थान उच्चन्यायालय  ने अपने आदेश में स्पस्ट लिखा था की PP3,PP 4 व  PP 5 के नियमानुसार प्रवेशित बालकों का भुगतान  सरकार को करना है, बावजूद इसके आज तक विभाग ने उक्त राशि  का भुगतान प्राइवेट स्कूलों को नहीं किया है जो की कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है.

3) नि:शुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण नियम विरुद्ध एवं गलत तरीके से करना।

नि:शुल्क सीट्स पर अध्ययनरत विद्यार्थियों की फीस का पुनर्भरण किस दर से किया जाएगा इसके लिए आर.टी.ई. अधिनियम की धारा-12(2) एवं राज्य के आर.टी.ई. नियम-11 में प्रावधान दिया गया है। इनके अनुसार सरकारी विद्यालयों में प्रति वर्ष प्रतिबालक जो खर्चा होता है उसके आधार पर यूनिट कॉस्ट तय की जाएगी तथा गैर-सरकारी विद्यालय की फीस इस यूनिट कॉस्ट से कम है तो विद्यालय की वास्तविक फीस दी जाएगी और यदि गैर-सरकारी विद्यालय की फीस यूनिट कॉस्ट से ज्यादा है तो भुगतान यूनिट कॉस्ट की सीमा तक ही किया जाएगा।  

सरकार द्वारा शैक्षिक सत्र 2021-22 में गैर-सरकारी विद्यालयों की फीस के भुगतान के लिए जो यूनिट कॉस्ट तय की थी उसी से 2022-23 एवं 2023-24 में भुगतान किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत एवं नियम विरुद्द है। इससे गैर-सरकारी विद्यालयों को लाखों की राशि का आर्थिक नुकसान उठाया पड़ रहा है। अतः इन वर्षों के लिए तत्काल यूनिट कॉस्ट का निर्धारण कर एरियर राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।  

4)  विद्यालयों में विद्यार्थियों के  दोहरे नामांकन पर एकतरफा कार्यवाही।

कुछ गैर-सरकारी विद्यालयों के नि:शुल्क सीट्स पर अध्ययनरत विद्यार्थियों ने बिना टी.सी.
लिए किसी सरकारी विद्यालय में प्रवेश ले लिया तथा गैर-सरकारी विद्यालय को सूचना भी नहीं दी। इन विद्यार्थियों का दोहरा नामांकन मानते हुए सरकार गैर-सरकारी विद्यालयों से पुनर्भरण राशि की बसूली कर उनके खिलाफ कार्यवाही कर रही है। ऐसे प्रकरणों में जांच के दौरान ये भी पता चला कि दोहरे नामांकन वाले इन प्रकरणों में कुछ बच्चे गैर-सरकारी विद्यालयों में ही पढ़  रहे हैं जबकि सरकारी विद्यालय उसे अपने यहाँ नामांकित दिखा कर उसके मिड-डे-मील, यूनिफार्म व पुस्तकों इत्यादि का पैसा उठा रहा है।

• दोहरे नामांकन के इन प्रकरणों में ज्यादातर ऐसे विद्यार्थी हैं जो बिना टी.सी. लिए तथा बिना सूचना दिए किसी अन्य विद्यालय में चले गए। नि:शुल्क सीट्स पर अध्ययनरत इन विद्यार्थियों को गैर-सरकारी विद्यालय अपनी मर्जी से पोर्टल से नहीं हटा सकता है, इसलिए ज्यादातर प्रकरणों में विद्यालयों की कोई गलती नहीं है। अतः ऐसे विद्यालयों के खिलाफ कार्यवाही करना अनुचित है।

• दोहरे नामांकन के इन प्रकरणों में से कुछ ऐसे भी हैं जहां बच्चे वास्तविक रूप से गैर-सरकारी विद्यालयों में ही पढ़ रहे हैं जबकि सरकारी विद्यालय उसे अपने यहाँ नामांकित दिखा कर उसके मिड-डे-मील इत्यादि का पैसा उठा रहे हैं। इन प्रकरणों में सरकारी विद्यालयों पर भी कार्यवाही की जानी चाहिए।

5)  गैर-सरकारी विद्यालय के शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार.

बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली वार्षिक परीक्षाएं अथवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गैर-सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को ड्यूटी पर नहीं लगाया जाता है।

समानता के सिद्धांत के आधार पर गैर-सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को भी समान अवसर मिलने चाहिए।

• इस प्रकार का व्यवहार भेद-भावपूर्ण एवं शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुँचने वाला है।

 उपरोक्त बिन्दुओं के संबंध में गैर-सरकारी विद्यालयों के साथ हो रहे अन्याय को रोकने एवं उनकी समस्याओं का समाधान करवाए जाने का श्रम करें।

समस्त प्राइवेट स्कूलों का निर्णय - ये देखने मे आया है की  शिक्षाविभाग लगातार, जानबूझकर  माननीय राजस्थान उच्चन्यायालय  के आदेशों की अवहेलना कर रहा है जो की न्यायसंगत नहीं है अतः  ज़ब तक शिक्षा विभाग राजस्थान उच्च न्यायलय के आदेशों की पालना में प्राइवेट स्कूलों  का समस्त बकाया भुगतान नहीं करदेता तब तक इस प्रकार की कोई भी जाँच करवाना समस्त प्राइवेट स्कूलों के लिए संभव प्रतीत नहीं होता  एवं तब तक  RTE  के अंतर्गत अन्य किसी नवीन प्रवेश  को लेना भी संभव नहीं हो पा रहा है।