जयपुर। बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को शनिवार को मुंबई की आर्थर रोड जेल से रिहा कर दिया गया,लेकिन इस केस के बाद एनसीबी के कारनामे साामने आ रहे हैं। आर्यन खान मामले में एनसीबी की कार्यवाही पर कईं सवाल खडे हो गये। एनसीबी के जोनल डाइरेक्टर समीर वानखेडे पर वसूली करने और जब्त किये गये ड्रग्स को बेचने के आरोप लगे हैं। महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक ने एनसीबी पर कईं आरोप लगाये जिसके बाद एनसीबी की भी जांच करने के लिए टीम बनाई गई। संघीय एजेंसी अब नए सिरे से आग की चपेट में आ गई है कि वह ड्रग-पेडलिंग के आरोपों से कैसे निपट रही है, इससे जुड़े कई मामलों की जांच एक साल में की गई थी। एक हालिया
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एनसीबी ने न केवल एक वर्ष में पांच ड्रग्स से संबंधित मामलों की शुरुआत की है, बल्कि केवल एक गवाह आदिल फजल उस्मानी को जांच एजेंसी द्वारा उन सभी की जांच करते हुए 'पंच गवाह' के रूप में पेश किया गया है। .यानि की एनसीबी ने पांचों केस में उस्मानी का उपयोग किया है। और इसी गवाह को आर्यन खान से जुड़े क्रूज शिप छापे में इस्तेमाल किया गया। रिकॉर्ड खंगालने के बाद सामने आया कि मुंबई के जोगेश्वरी क्षेत्र के निवासी उस्मानी को एनसीबी ने इन पांच मामलों में पंच गवाह के रूप में पेश किया गया थाा।
उस्मानी के अलावा, एनसीबी द्वारा पेश किये दो अन्य पंच गवाहों में किरण गोसावी और मनीष बाहुबली शामिल हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में बताया कि गोसावी को 2018 के धोखाधड़ी के मामले में पुणे में गिरफ्तार किया गया था।