संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा राजस्थान|
वसीयत के आधार पर 69ए में पट्टा लेने की कार्यवाही से पीछे हटे मंत्री:- गुंजल
स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के बहुचर्चित नवरंग होटल पट्टा प्रकरण में मंत्री द्वारा सिविल लाइंस प्लान एरिया में अपनी मां की वसीयत के आधार पर 69ए में चाहे गए नवरंग होटल के पट्टे के आवेदन से पीछे हटते हुए धारीवाल द्वारा 1956 के एक फर्जी विक्रय पत्र के आधार पर नाम हस्तांतरण चाहने पर पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने निगम अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है ।
पूर्व विधायक गुंजल ने कहा कि पूर्व में जब धारीवाल द्वारा अपनी मां की वसीयत के आधार पर प्लान एरिया सिविल लाइंस में 69ए के तहत नवरंग होटल के पट्टे का आवेदन किया था उस समय और कोई भी दस्तावेज उक्त पत्रावली में नहीं था। हमारे द्वारा आपत्ति दर्ज कराने के बाद प्लान एरिया में 69ए के तहत पट्टा बनाने से निगम अधिकारियों ने इंकार कर दिया तो मंत्री ने पद का दुरुपयोग करते हुए तीन दिन तक निगम अधिकारियों को अपने जयपुर स्थित आवास पर बैठाए रखा तथा इन दिनों फर्जी दस्तावेज तैयार करने का खेल चला और फिर अचानक खुल जा सिम सिम की तरह दस्तावेजों के रूप में 1956 का एक विक्रय आलेख अचानक नगर निगम में प्रकट हो गया।
फर्जी विक्रय आलेख के आधार पर नाम हस्तांतरण चाह रहे मंत्री धारीवाल
गुंजल ने कहा कि प्लान एरिया में 69ए में पट्टा जारी नहीं किया जा सकता इस आपत्ति के बाद 1956 के फर्जी विक्रय आलेख के आधार पर मंत्री धारीवाल ने निगम अधिकारियों पर दबाव बनाकर नाम हस्तांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ की है। जिसकी सूचना की विज्ञप्ति नगर निगम कोटा उत्तर द्वारा 28 मई को एक प्रदेश स्तरीय समाचार पत्र में शाया की गई है। गुंजल ने फर्जी विक्रय पत्र पत्र के आधार पर नाम हस्तांतरण की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि विज्ञप्ति में यह दर्शाया गया है कि अब मंत्री जी को भूखंड के दस्तावेज मिल गए हैं और अब मंत्री धारीवाल नवरंग होटल का 69ए में पट्टा बनवाने के बजाय उक्त भूखंड का नाम हस्तांतरण करवाना चाह रहे हैं।
गुंजल ने निगम अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गलत काम किया तो आगामी राज में जेल जाना होगा
पूर्व विधायक गुंजल ने साफ-सुथरे शब्दों में निगम अधिकारियों को आगाह करते हुए चेतावनी दी है कि जिसने भी मंत्री के दबाव में आकर गलत काम किया तो वह उसके गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह भी समझ में आना चाहिए कि मंत्री के दबाव में प्रकट हुए 1956 के विक्रय पत्र की तब तक कोई विधिक मान्यता नहीं रह जाती है जब तक की उस आक्षय की पत्रावली विक्रय पत्र जारी करने के संदर्भ में संपूर्ण नोटशीट सहित निगम में उपलब्ध नहीं होती। गुंजल ने कहा कि फर्जी तरीके से तैयार किए गए विक्रय पत्र व उसके अतिरिक्त नोटशीट सहित संपूर्ण पत्रावली यदि निगम में उपलब्ध है तो उसे सूचना के अधिकार के तहत किए गए आवेदन पर आवेदक को तुरंत उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारियों को याद रखना चाहिए कि गलत पट्टा जारी करने व गलत तरीके से नाम हस्तांतरण करने से बड़ा अपराध गलत दस्तावेज तैयार करना है। अधिकारियों को गलत काम करने से बचना चाहिए अन्यथा अगले राज में गलत काम का परिणाम सभी को भुगतना होगा।
पहले पट्टा और अब नाम हस्तांतरण ही अपने आप में संदिग्ध परिस्थितियों का संकेत देता है
पूर्व विधायक गुंजल ने कहा कि विभागीय मंत्री द्वारा पहले प्लान एरिया में वसीयत के आधार पर 69ए के तहत पट्टा चाहना व आपत्ति के बाद संदिग्ध विक्रय पत्र के आधार पर नाम हस्तांतरण जैसी कार्यवाहियां किया जाना ही अपने आप में संदिग्ध परिस्थितियों का संकेत देता है। उन्होंने खुले शब्दों में कहा कि खुल जा सिम सिम की तरह फर्जी विक्रय पत्र के आधार पर अधिकारियों ने यदि नाम हस्तांतरण की कार्यवाही की तो संपूर्ण पत्रावली कि अगले राज में जांच कर दोषियों को दंडित किया जाएगा।
मंत्री व अधिकारियों पर पूर्व में भी गलत तरीके से जारी एकल पट्टा प्रकरण में चल रहा है मामला
गुंजल ने कहा कि निगम अधिकारियों को इस बात का भी स्मरण होना चाहिए कि पूर्व में मंत्री के दबाव में जारी एकल पट्टा प्रकरण में कई अधिकारी जेल जा चुके हैं व अभी भी मंत्री सहित अधिकारियों पर परिवाद एसीबी कोर्ट में विचाराधीन है। उक्त प्रकरण में भी मंत्री ने पद का दुरुपयोग करते हुए एफआर लगवा दी थी जिसमें माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट ने एसपी से भी सक्षम अधिकारी से पुनः जांच के आदेश दिए हैं । गुंजल ने निगम अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन सभी बातों को स्मरण रखते हुए ही निगम अधिकारियों को बहुचर्चित नवरंग होटल प्रकरण में काम करना चाहिए व गलत करने व गलत काम में साथ देने से बचना चाहिए
एडवोकेट मनीष शर्मा ने नाम हस्तांतरण पर दर्ज कराई आपत्ति
पूर्व में प्लान एरिया में नवरंग होटल का 69ए में पट्टा मांगे जाने पर निगम द्वारा मांगी गई सार्वजनिक आपत्तियों पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके एडवोकेट मनीष शर्मा ने 28 मई को एक प्रदेश स्तरीय समाचार पत्र में सार्वजनिक विज्ञप्ति जारी कर भूखंड संख्या 7 के नाम हस्तांतरण पर निगम द्वारा मांगी गई आपत्तियों में आज पुनः अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। एडवोकेट मनीष शर्मा के अनुसार नियमो के दायरे में किसी भी सूरत में यह नाम हस्तांतरण नहीं किया जा सकता है।