शिवकुमार शर्मा
बूंदी |
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा मंगलवार को मोतीपुरा गांव में सोयाबीन की फसल (किस्म- जे.एस. 20-34,) के कलस्टर प्रथम पंक्ति प्रदर्शन लगाये गये। प्रदर्शनों में सोयाबीन की फसल को एकीकृत फसल प्रबन्धन विधि के द्वारा कृषकों के खेत पर होने वाली पैदावार के परिणामों एवं किसानों के स्वयं के अनुभवों को गांव के अन्य कृषकों को जानकारी देने के लिए प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें गांव के 48 कृषकों ने भाग लिया।
उद्यान वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी इंदिरा यादव ने बताया कि एकीकृत फसल उत्पादन विधियों एवं समन्वित कीट रोग प्रबन्धन तकनीकों को अपनाकर कृषक सोयाबीन की अधिकतम पैदावार लेते हुए अपनी आय को बढ़ा सकते हैं एवं उत्पादित सोयाबीन को आगामी बुवाई के लिए बीज के रुप में रखकर काम में लिया जा सकता है तथा अन्य किसानों को बुवाई के लिए विक्रय भी किया जा सकता है। जिससे किसान इस किस्म का गांव के स्तर पर ही खरीदकर प्रयोग कर सकते हैं।
केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम मीणा ने पशु प्रबन्धन के बारे में जानकारी दी। डॉ. कमला महाजनी गृह वैज्ञानिक ने पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ ही न्यूट्री गार्डन लगाने की उपयोगिता के बारे में बताया एवं कार्यक्रम का संचालन किया।