ट्रैफिक प्रभारी ₹7000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार”

ईमानदारी की छवि या वसूली का खेल? ट्रैफिक प्रभारी ₹7000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार”

बारां। जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एसीबी ने यातायात शाखा के प्रभारी एसआई चंद्रप्रकाश मीणा को ₹7000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह राशि ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों से कथित रूप से “मासिक बंदी” के नाम पर वसूली जा रही थी। कार्रवाई को एसीबी एएसपी कालूराम वर्मा ने अंजाम दिया, जबकि पूरी कार्रवाई एसीबी डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में हुई।
शहर में इस गिरफ्तारी के बाद भ्रष्टाचार और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। जिस अधिकारी को कुछ समय पहले तक सख्त, अनुशासित और ईमानदार छवि वाला अधिकारी माना जा रहा था, उसी पर रिश्वतखोरी के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सख्ती से बनाई थी पहचान
शहर में पदभार संभालने के बाद यातायात प्रभारी ने अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था के खिलाफ अभियान चलाकर अपनी अलग पहचान बनाई थी। फुटपाथों पर कार्रवाई, अवैध कब्जों को हटाने और यातायात नियमों के पालन को लेकर उनकी कार्यशैली चर्चा में रही। आमजन को लगा कि शहर को एक कर्मठ और निष्पक्ष अधिकारी मिला है जो नियमों के पालन में किसी दबाव को नहीं मानता।
फिर शुरू हुई कानाफूसी
लेकिन समय बीतने के साथ शहर में अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आने लगीं। कई लोगों का आरोप था कि नियमों के नाम पर कार्रवाई का दायरा गरीब और सामान्य वर्ग तक ही सीमित रहा, जबकि कुछ मामलों में कथित रूप से आर्थिक लेन-देन की बातें भी सुनाई देने लगीं। ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों के बीच भी यह चर्चा थी कि कार्रवाई से बचने के लिए “मासिक व्यवस्था” का दबाव बनाया जाता है।
हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि पहले कभी नहीं हुई, लेकिन एसीबी की ताजा कार्रवाई ने इन चर्चाओं को नया आधार दे दिया है।
“काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती”
शहर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में अब यही कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार चाहे कितनी भी सख्ती और ईमानदारी की परतों में क्यों न छिपा हो, एक दिन सामने आ ही जाता है। लोग कह रहे हैं कि “काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती” और आखिरकार एसीबी के जाल में यातायात प्रभारी फंस ही गए।
एसीबी की कार्रवाई से मचा हड़कंप
रिश्वत लेते हुए गिरफ्तारी की खबर फैलते ही पुलिस महकमे सहित पूरे शहर में हड़कंप मच गया। लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि यदि यातायात व्यवस्था संभालने वाला अधिकारी ही कथित रूप से अवैध वसूली में लिप्त पाया जाता है तो आम नागरिकों का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

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