अग्निपथ योजना को अविलंब वापस लिया जाए : मनोज दुबे
संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा राजस्थान
कोटा 19 जून।अखिल भारतीय बेरोजगार मजदूर किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने केंद्र की भाजपा सरकार के द्वारा लाई गई सेना में संविदा पर भर्ती की योजना का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि "अग्निपथ" देश के नौजवानों के सपनों को अग्नि में झोंकने वाली योजना है।जिसे केंद्र सरकार द्वारा अविलंब वापस लिया जाए।
मनोज दुबे ने कहा कि सेना में ठेका प्रथा शुरू कर देश के युवाओं को झुनझुना पकड़ाना मोदी सरकार को बहुत महंगा पड़ेगा। आज देश के करोड़ो युवा बेरोजगार हैं और सिर्फ रोजगार मांग रहे हैं इसलिए उन्हें सड़कों पर बेरहमी से पीटा जा रहा है, गिरफ्तार किया जा रहा है और उनके भविष्य के साथ बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। मोदी सरकार के द्वारा किसान विरोधी बिल,नोटबन्दी और अपने तमाम ऐसे फिजूल के तानाशाही फरमान के जैसे ही अग्निपथ योजना को भी थोपा जा रहा है। बार-बार नौकरी की झूठी उम्मीद दे कर, प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को बेरोज़गारी के ‘अग्निपथ’ पर चलने के लिए मजबूर किया है।8 सालों में,16 करोड़ नौकरियां देनी थीं मगर युवाओं को मिला सिर्फ़ पकोड़े तलने का ज्ञान। देश के इस हालत के ज़िम्मेदार केवल मोदी सरकार है।
मनोज दुबे ने कहा कि जिस महान सेना की वीर गाथाएँ कह सकने में समूचा शब्दकोश असमर्थ हो, जिनके पराक्रम का डंका समस्त विश्व में गुंजायमान हो, उस भारतीय सैनिक को किसी राजनीतिक दफ़्तर की ‘चौकीदारी’ करने का न्यौता देना बेहद शर्मनाक है।भारतीय सेना माँ भारती की सेवा का माध्यम है, महज एक ‘नौकरी’ नहीं।एक तरफ भाजपा दावा कर रही है की अग्निपथ से युवाओं को रोजगार मिलेगा उनका भविष्य उज्ज्वल होगा, वही उसी अग्निपथ योजना के अग्निवीर को भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के कार्यालय में सिक्योरिटी के पद पर रखने की बात कर रहे है ये युवाओं और सेना दोनों का अपमान है।
मनोज दुबे ने कहा कि भाजपा सोचती है कि लोग फ़ौज में नौकरी करने जाते हैं, दरअसल युवा देश-प्रेम के जज़्बे से सेना में जाते हैं, लेकिन ये वो क्या जानें जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन तक में हिस्सा ही न लिया हो।भाजपा सरकार देश को ‘जय जवान जय किसान’ से ‘रुष्ट जवान रुष्ट किसान’ के बुरे हालातों में ले आई है।केंद्र की सरकार की हट की वजह से आज देश का छात्र-नौजवान सड़कों पर है। वायदा सालाना दो करोड़ रोज़गार का था तो अब चार साल वाला अग्निपथ क्यूँ ?