उदघाटन से पहले घटिया निर्माण की जाँच कराये मंत्री: गुंजल
संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा राजस्थान
कोटा: पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने देवनारायण पशुपालक योजना के उदघाटन से पहले उसके निर्माण व पशुपालकों से ली जा रही राशि को लेकर सवाल उठाते हुए कहा की पुनिया देवरी एवं धर्मपुरा की भूमि पर 300 करोड़ रुपए की यह योजना न तो अनूठी है नहीं दीर्धकालिक हैं।
गुंजल ने कहा कि आज जिस देवनारायण पशुपालक योजना का उदघाटन स्वायत्त शासन मंत्री करने जा रहे हैं उससे पहले मंत्री उसके घटिया निर्माण क्वालिटी की जाँच करा लेते। अभी से ही स्कूल की दीवारों सहित भवनों में दरारें पड़ गई है।उन्होंने कहा कि कांता उपवन परिसर व बालागंज केटल कॉलोनी लखनऊ की योजना की नकल कर इस योजना को बनाने का प्रयास किया गया है। उन योजनाओं को देखने के लिए नगर विकास न्यास के चार अधिकारी भेजे गए थे जिनका पशुपालन से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। अच्छा होता पशुपालन का व्यवहारिक ज्ञान रखने वाले लोगो को भी इसमें शामिल किया जाता।
दबाव बनाकर किया जा रहा शिफ्ट
गुंजन ने कहा कि गरीब पशुपालकों पर भारी आर्थिक बोझ डालकर जबरन वहां शिफ्ट किया जा रहा है जो अनुकूल नहीं है । जिस जगह दो लाख रूपए बीघा की डीएलसी रेट हो वहां एक बीघा में 35*70 व 40*70 के प्लाट काटकर लोगों से 20 से 30 लाख रुपए वसूले जा रहे हैं। ईमानदारी से उस घटिया निर्माण की कीमत भी यदि निकाली जाए 5 से 7 लाख से ज्यादा उसकी कोस्ट नहीं आएगी। कुल मिलाकर यह कॉलोनी सरवाइव करने वाली नहीं है कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है ।
मंत्री उद्घाटन से पहले इसकी जांच क्यों नहीं करवाना चाहते
गुंजल ने कहा कि मंत्री उद्घाटन की जल्दी नहीं कर पहले इसके निर्माण की जांच एसीबी व क्वालिटी कंट्रोल से कराएं सिर्फ देवनारायण आवासीय पशुपालन योजना नाम देने से काम नहीं चलता।
भू राजस्व अधिनियम का हो रहा उलंघन
गुंजल ने कहा कि देवनारायण पशुपालक आवासीय योजना के नाम देकर आपने पशुपालन के लिए जो कॉलोनी बनाई है वह भू राजस्व अधिनियम का सीधा-सीधा वायलेशन है। भू राजस्व अधिनियम जमीनों के मामले का प्रिंसिपल एक्ट है जिसको नगर निगम व यूआईटी एक्ट सुपर स्पीड नहीं कर सकता। और भू राजस्व अधिनियम कहता है कि जो राजस्व की जमीन अर्बन एरिया में आ गई चाहे आबादी हो, गैरमुमकिन आबादी हो या सिवायचक दर्ज हो उस पर पशुपालन, कुकर पालन व सूअर पालन की योजना किसी भी सूरत में नहीं बनाई जा सकती। कुल मिलाकर यह कॉलोनी गैरकानूनी तरीके से बनाई गई है।
साथ ही गुंजल ने कहा कि छोटे छोटे भूखंडों में पशुपालकों का गुजारा नहीं हो सकता कई पशुपालकों के पास 50-50 जानवर हैं 20-20 जानवर हैं। यह तीन चार जानवर बांधने वाले लोगों के हिसाब से कॉलोनी बनाई गई है। पर्दे के पीछे से शौकिया तौर पर एक दो गाय पालने वाले लोगों को उपकृत करने का नगर विकास न्यास का पशुपालकों के नाम से षड्यंत्र है। पहले इन सभी तथ्यों की जांच कराई जाए व उसके बाद इस योजना का उद्घाटन किया जाए।