बारां : अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल चेतनाशक्ति सम्मेलन की राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सपना गोयल ने बताया जैन धर्म का प्रसिद्ध लोकप्रिय संस्कृत भक्तामर स्तोत्र भक्तामर स्त्रोत 48 दीपको के साथ रिद्धि- सिद्धि मंत्रो से अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर पर बुधवार को किया गया
राजा भोज ने मानतुंगाचार्य को जेल में अड़तालीस तालों की एक श्रृंखला में उन्हें बंद कर दिया। मानतुंगाचार्य ने उस समय तीर्थंकर भगवान आदिनाथ प्रभु की स्तुति प्रारंभ की। स्तुति में लीन हो गए, ज्यों-ज्यों श्लोक बनाकर वे बोलते गए, त्यों-त्यों ताले टूटते गए। सभी ने इसे बड़ा आश्चर्य माना। इस आदिनाथ स्तोत्र का नाम भक्तामर स्तोत्र पड़ा। इसको भक्ति व भाव पूर्वक ध्यान से बोलने व पढ़ने से सभी बीमारी, रोग व संकट दूर होकर जीवन सुख शांतिमय रहता है।
कल्पना जैन बारां जिला सह सचिव व मीरा जैनसचिव ने बतायाएक बात तो निश्चित है कि इस स्तोत्र में... भक्तामर की गाथाओं में कुछ ऐसा अनोखा तत्व छुपा हुआ है... कि सदियाँ बीत जाने पर भी उसका प्रभाव अविकल है... अविच्छिन्न है। चूँकि यह शाश्वत सत्य है। पूरी आस्था, निष्ठा एवं समर्पण के भावालोक में इस स्तोत्र का गान जब होता है, तब असीम आनंद की अनुभूति में अस्तित्व झूम उठता है... नाच उठता है।