जयपुर। बिहार में आज विधानसभा सत्र की शुरूआत से पहले भाजपा विधायक बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। महागठबंधन के सत्ता में आने के तुरंत बाद उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। नीतीश कुमार जिन्होंने बिहार में भाजपा के साथ अपना गठबंधन समाप्त कर लिया और इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रीय जनता दल ;राजद और अन्य दलों के साथ सरकार बनाई आज अपने बहुमत की परीक्षा का सामना कर रहे हैं।
पहले सिन्हा ने निराधार दावों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। सिन्हा ने कहा कि वह पद छोड़ने से पहले प्रस्ताव का जवाब देना चाहते थे क्योंकि उनके खिलाफ आरोप अस्वीकार्य हैं। माना जाता है कि राज्य सरकार ने राजद के दिग्गज नेता अवध बिहारी चौधरी को नया अध्यक्ष बनाने का फैसला किया है।
विश्वास मत से कुछ घंटे पहले कई राजद नेताओं सुनील सिंह, सुबोध राय, डॉ फैयाज अहमद और अशफाक करीम के घरों पर सीबीआई ने पटना में पार्टी प्रमुख से जुड़े भूमि के बदले जमीन घोटाले के सिलसिले में छापेमारी की थी। ये सभी लालू सरकार में केंद्रिय मंत्री रह चुके हैं।
विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि यह अनुमानित था और आरोप लगाया कि छापे भाजपा के इशारे पर किए गए थे। उन्होंने कहा, यह कहना बेकार है कि यह ईडी या सीबीआई की छापेमारी है यह भाजपा की छापेमारी है। आज फ्लोर टेस्ट है और यहां क्या हो रहा है यह अनुमान लगाया जा सकता है।
राजद नेता और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने कहा कि कोई भी छापेमारी महागठबंधन सरकार को डरा नहीं सकती। उन्होंने कहा भाजपा को छोड़कर सभी दल हमारे साथ हैं। हमारे यहां राज्य में बहुमत है और हम डरेंगे नहीं।
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन करने वाले 164 विधायकों के साथए बहुमत की परीक्षा ज्यादातर औपचारिकता है। विधानसभा की वर्तमान ताकत 241 है और किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत के लिए 121 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।