कांग्रेस ने जारी किये टिकट देने के मापदंड, अपनायेगी एक परिवार एक टिकट की नीति, लेकिन गांधी प​रिवार पर नहीं होगा लागू

जयपुर। कांग्रेस का तीन दिवसीय नवसंकल्प चिंतिन शिविर आज से उदयपुर में शुरू हो गया है। चिंतन शिविर में संगठन में बदलाव और राजनीतिक मामलों पर बने पैनल ने यह सुझाव दिया है कि अब किसी भी राजनीति नेता के परिवार में एक से ज्याद टिकट नहीं दिये जायेंगे। यह सुझाव आगामी लोकसभा चुनाव में तय माना जा रहा है। हालांकि यह नियम गांधी परिवार पर लागू नहीं होगा।

पैराशूट नेताओं को नहीं मिलेगा टिकट
चिंतन शिविर पैनल द्वारा यह भी चर्चा की गई कि जो नेता डाइरेक्ट पार्टी में एंट्री करेंगे उन्हें टिकट नहीं दिया जायेगा। साथ ही पार्टी के साथ पांच साल काम करने वाले कार्यकर्ता को ही टिकट के योग्य माना जायेगा। राजस्थान कांग्रेस प्रभारी अजय माकन ने कहा- इस बात की भी सिफारिश की गई है कि पार्टी में लगातार 5 साल के काम करने के बाद किसी को दूसरा पद नहीं दिया जाए। कम से कम 3 साल का कूलिंग पीरियड रहे। तीन साल के गैप के बाद ही आगे कोई पद दिया जाए।

नेता के बेटे को पार्टी में करना होगा काम
यदि कोई नेता अपने बेटे का पार्टी टिकट देने की पैरवी करता है तो उसे टिकट नहीं दिया जायेगा। अगर वह पार्टी के साथ कम से कम पांच साल काम करेगा उसके बाद ही उसे टिकट दिया जायेगा।

बता दें कि इससे पहले कई कांग्रसे के नेताओं के परिवार में एक से ज्यादा टिकट दिये गये हैं जिनमें कांग्रेस में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जैसे कई बडे नेताओं का नाम शामिल हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को लोकसभा चुनाव में जोधपुर से टिकट दिया गया था। मंत्री महेंद्र जीत मालवीय की पत्नी रेशम मालवीय को बांसवाड़ा जिला प्रमुख बनाया गया। वहीं मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ छिंदवाड़ा से सांसद हैं।