लोकसभा में 'क्रिमिनल आइडेंटिफिकेशन बिल 2022' बहुमत के साथ पारित हुआ, गृह मंत्री बोले नहीं होगा दुरूपयोग

जयपुर। सोमवार को लोकसभा में क्रिमिनल आइडेंटिफिकेशन बिल 2022 बहुमत के साथ पारित कर दिया गया है। इस बिल के आने के बाद अब पुलिस को अपराधियों पर दोषसिद्ध करने में मदद मिलेगी। इस बिल के तहत अपराधियों का के रेटिना और आईरिस स्कैन सहित सभी भौतिक और जैविक सैम्पल स्टोर किये जायेंगे और और उनके विश्लेषण के आधार पर दोषियों को सजा दिलाई जा सकेगी।

कानून का दुरूपयोग नहीं होगा
लोकसभा में प्रस्तावित कानून पर बहस के दौरान गृहमंत्री अमित शाह इस कानून का कोई भी दुरूपयोग नहीं करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस बिल का इसका एकमात्र उद्देश्य देश में दोषसिद्धि दर में सुधार करना, कानून का पालन करने वाले करोड़ों नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करना और समाज में एक मजबूत संदेश भेजना है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के माध्यम से वह 2014 में "स्मार्ट [सख्त और संवेदनशील, आधुनिक और मोबाइल, अलर्ट और जवाबदेह, विश्वसनीय और उत्तरदायी, तकनीकी जानकार और प्रशिक्षित]" पुलिसिंग के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के "टी" को लागू कर रहे थे।

विपक्ष ने संशोधन का प्रस्ताव रखा
वहीं, विपक्ष के सदस्यों ने इस बिल को पारित करने से पहले सदन में इस बिल पर विस्तृत चर्चा करने और सुधार के लिए विधेयक को संसदीय स्थायी या प्रवर समिति के पास भेजने का आग्रह किया।

गृह मंत्री ने कहा कि 2020 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के लोकसभा में रखते हुए कहा कि भारत में 2020-21 में हत्या के मामलों में कुल दोषसिद्धि दर सिर्फ 44% बलात्कार के मामलों में 39%; हत्या के प्रयास के मामलों में 24%; डकैती में 38%; और डकैती के मामलों में 29 फीसदी है। वहीं, यूनाइटेड किंगडम में औसत सजा दर 83.6% थी, कनाडा में यह 68%, दक्षिण अफ्रीका में 82%, ऑस्ट्रेलिया में 97% और संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 93% थी। उन्होंने कहा कि ये सभी देश मानवाधिकारों के हिमायती हैं और उनके पास और कड़े कानून हैं।