डोल मेले में उमड़ा रेला, हर तरफ रही भीड़
बारां 08 अक्टूबर। हाड़ौति का ख्यातनाम डोल मेला इन दिनों पूर्ण यौवन पर है। शनिवार रात मेले में अब तक सर्वाधिक भीड़ उमड़ने से बाजार ठसाठस रहे। रात 1 बजे बाद तक भी खरीदारी जारी रही। लोग परिवार के साथ चौपाटी बाजार में खानपान और झूला चकरी व अन्य मनोरंजन के साधनों का लुत्फ उठाते रहे।
शनिवार को मेला रंगमंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन को देखते हुए शाम ढलते ही मेले में लोग उमड़ना शुरू हो गए थे। व्यापारियों को भी इस दिन का खास इंतजार रहता है। दूर-दराज से लोग निजी साधनों से बड़ी संख्या में मेला देखने और कवि सम्मेलन सुनने पहुंचे। नौकरी-पेशा और शहरी क्षेत्र से लोगों ने भी अवकाश को देखते हुए परिवार सहित मेले का लुत्फ उठाया। जो परिवार अब तक मेले में नहीं गया। वे इस दिन का विशेष रूप से इंतजार कर रहे थे। रविवार को भी साप्ताहिक अवकाश रहने के कारण बच्चों की विशेष जिद रहने पर अभिभावक उन्हें मेला दिखाने से रोक नहीं सके। रात को उमड़ी भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जनता मार्केट, अस्पताल रोड पर एसबीआई बैंक, दानदयाल पार्क तक, मांगरोल रोड पर माथना तिराहे तक कारों, ट्रेक्टर-ट्रॉलियां व ऑटो की कतारें लगी रही।
खरीदारी में बूम-
डोल मेले में जिले सहित समीपवर्ती कोटा, बूंदी व झालावाड़ तथा मध्यप्रदेश के गुना, शिवपुरी व श्योपुर के ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग मेला देखने आ रहे हैं। मेले में बढ़ती भीड़ से खरीदारी में आए बूम के चलते व्यापारी प्रसन्नता जाहिर कर रहे हैं। प्रतिवर्ष भीलवाड़ा से मेले में आयुर्वेद की दवाईयां बेचने आने वाले सोनू जौहरी ने बताया कि शुरूआत फीकी थी। लेकिन अब ठीकठाक है। मेले में बिक्री बढ़ गई है। इससे दुकानदार भी खुश हैं। इस बार मेले में पिछली बार रही कसर भी पूरी हो जाएगी।
फसल से फुर्सत मिली तो किया मेले का रूख-
अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में नौकरी पैशा लोगों सहित आमजन के हाथ में पैसा आने लगा है। वहीं किसानों की सोयाबीन फसल व अन्य फसलें भी तैयार होकर मंडी में बिकने आ रही है। ऐसे में अब किसान व खेतिहर मजदूर भी मेला देखने आ रहा है। व्यवसायी मुकेश पांचाल ने बताया कि बारां जिला कृषि प्रधान होने के कारण यहां की अर्थव्यवस्था भी कृषि पर ही निर्भर है। मंडी में जब तक फसल बिक नहीं जाती, किसान चिंतामुक्त नहीं हो पाता।
मीना बाजार में विशेष रौनक-
मेले में सजाए मीना बाजार में सर्वाधिक भीड़ महिलाओं की रहती है। जिसमें महिलाओं को अपने सौंदर्य प्रशाधन, आर्टिफिशियल ज्वैलरी से लेकर चूड़ी, चप्पल, जूतियां, रेडिमेड कपड़े, प्लास्टिक और सजावटी वस्तुओं समेत हर जरूरत की चीजें मिल जाती है। मध्यप्रदेश के उज्जैन से बैंगल्स की दुकान लगाने वाले व्यापारी बबलू भाई का कहना है कि हर बार मेले में आते हैं। शुरूआत धीमी रहती है। लेकिन दूसरे सप्ताह से बिक्री परवान पर हो जाती है। इस वर्ष डोल मेला माह के प्रथम पखवाड़े में आया है। जिससे व्यापार भी उम्मीद से अच्छा ही होगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी उमड़ रही भीड़-
मेलाध्यक्ष शिवशंकर यादव ने बताया कि डोल मेला रंगमंच पर प्रतिदिन हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों दर्शकों की अच्छी भीड़ उमड़ रही है। राजस्थानी व अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा में श्रोताओं ने भोर तक आनंद लिया। नगर परिषद एवं पुलिस प्रशासन की टीम मेलार्थियों व व्यापारियों की सुरक्षा व सुविधाओं को पूरा ध्यान रखे हुए। अभी मेले में स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होने बाकी है।