डांगावास फैसले के विरोध में जयपुर में उमड़ा जनसैलाब करीब 5 हजार लोगों ने शहीद स्मारक पर दिया धरना, 36 कौम ने एक स्वर में कहा—इंसानियत बड़ी बात है, न्याय होना ही चाहिए
जयपुर। डांगावास हत्याकांड में विशेष न्यायालय, मेड़ता सिटी द्वारा सभी 40 अभियुक्तों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ बुधवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसाइटी, राजस्थान, जयपुर के नेतृत्व में विशाल धरना आयोजित किया गया। धरने में राजस्थानभर से करीब पांच हजार लोग शामिल हुए। फैसले को लेकर समाज में दिखाई दे रहे भयंकर आक्रोश के बीच प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग न्याय की आवाज को मजबूती देने जयपुर पहुंचे।
धरने में डांगावास हत्याकांड के पीड़ित परिवारों की ओर से गोविंद मेघवाल, मोहन मेघवाल, धन्नाराम मेड़ता और बगड़ाराम मेड़ता भी शामिल हुए। वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ित परिवारों की मौजूदगी ने धरने को भावनात्मक और गंभीर स्वरूप दिया।
धरने में राजस्थान के विभिन्न जिलों से 36 कौम के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे। आंदोलन को समर्थन देने आए लोगों ने कहा कि डांगावास का मामला किसी एक समाज का नहीं, बल्कि इंसानियत और न्याय का सवाल है। उन्होंने एक स्वर में कहा—“इंसानियत बड़ी बात है, न्याय होना ही चाहिए।”
धरने को संबोधित करते हुए सोसाइटी के अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस सत्यवीर सिंह ने कहा कि डांगावास की भयावह घटना में पांच लोगों की हत्या हुई और अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पीड़ित परिवार करीब ग्यारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में सभी 40 अभियुक्तों के बरी होने के फैसले से पीड़ित परिवारों और समाज में गहरा आक्रोश एवं निराशा पैदा होना स्वाभाविक है।
सत्यवीर सिंह ने कहा कि न्यायपालिका के प्रति हमारा पूरा सम्मान है, लेकिन कानून द्वारा उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अधिकार है। सरकार को चाहिए कि फैसले के विरुद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रभावी अपील दायर कराए और मामले की मजबूत एवं निष्पक्ष पैरवी सुनिश्चित करे। ज्ञापन में भी हाईकोर्ट में तत्काल अपील, अनुभवी विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति तथा प्रभावी पैरवी की मांग की गई है।
सोसाइटी के उपाध्यक्ष आर.पी. बैरवा ने भी धरने को संबोधित करते हुए कहा कि डांगावास के पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक और वैधानिक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर से जिस तरह 36 कौम के लोग इस आंदोलन के समर्थन में आए हैं, वह सामाजिक एकजुटता और इंसानियत की ताकत का प्रमाण है।
धरने को दौसा विधायक डी.सी. बैरवा, पिलानी विधायक पितराम काला, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा, पूर्व विधायक पूरन सैनी खेतड़ी, जय नारायण शेर, श्रीराम चोरड़िया, बी.एल. बैरवा, टेकचंद राहुल, जे.पी. विमल, रवि मेघवाल, राकेश जॉय, गीगराज जोड़ली, महेंद्र खंडेलवाल, भंवर लाल सांभरिया एवं विनोद वर्मा रलावता सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से लोग अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक सीमाओं से ऊपर उठकर इस आंदोलन में शामिल हुए हैं। 36 कौम की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि न्याय की लड़ाई किसी एक जाति या समुदाय की लड़ाई नहीं होती। जब किसी परिवार के साथ अन्याय होता है तो इंसानियत का तकाजा है कि समाज उसके साथ खड़ा हो।
धरने के बाद प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम पुलिस आयुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से विशेष न्यायालय के फैसले के विरुद्ध राजस्थान हाईकोर्ट में तत्काल वैधानिक अपील दायर कराने, पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता एवं सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा मामले की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में पीड़ित परिवारों और महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा का तत्काल पुलिस स्तर पर ऑडिट कराने तथा आवश्यकता के अनुसार प्रभावी सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की गई, ताकि किसी प्रकार का भय, दबाव या धमकी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।
वक्ताओं ने कहा कि डांगावास प्रकरण केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं है, बल्कि यह न्याय, मानवीय संवेदना, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। करीब ग्यारह वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के दर्द को समझते हुए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
धरने में उमड़े हजारों लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि डांगावास के पीड़ित परिवार अकेले नहीं हैं। राजस्थान का समाज उनके साथ खड़ा है और न्याय की इस वैधानिक लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा।