डोल मेला पूर्ण यौवन पर, उमड़ रही भारी भीड़ -हवाई झूले-चकरी और मीना बाजार बने आकर्षण के केंद्र

बारां 2 अक्टूबर। बारां का डोल मेला अब पूर्ण यौवन पर भरने लगा है। दिनप्रतिदिन उमड़ रही मेलार्थियों की भीड़ से व्यापारियों में उत्साह का देखने को मिल रहा है। रविवार रात को मेले में भीड़ के कारण पैर रखने की जगह तक नहीं थी। मीना बाजार, झूला मार्केट, बर्तन बाजार, चाट बाजार, चौपाटी, मुख्य बाजार समेत डोल मेला तालाब पर खासी रौनक रही। वहीं रंगमंच पर आयोजित हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों भी दिनप्रतिदिन दर्शकों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। गत रात्रि को आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम को देखने के लिए दर्शकों का भारी हुजूम उमड़ा। महिलाएं भी काफी संख्या में थी। प्रवेश द्वार से लेकर पूरे मेला परिसर में अब तक की सर्वाधिक भीड़ रविवार रात को रही। व्यापारियों को कहना है कि मेलार्थी मनपंसद वस्तुए खरीद रहे है। व्यापारियों को अब फुर्सत नहीं मिलती है। मध्यरात तक मेला पूरे शबाब पर रहता है।

लुभा रहे झूले-चकरी और नाव-
मेले में इस बार झूले-चकरी विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। झूलों पर लगी रंगीन ट्यूबलाइटें दूर से ही मेलार्थियों का ध्यान खींच लेती है। रविवार को मध्यरात तक लोग परिवार सहित झूले-चकरी में झूलने का आनंद लेते रहे। इनमें हवाई झूलों की ओर अधिक भीड़ बनी रही। जबकि बच्चों ने मिकी माउस, नाव, चकरी, चेयर व ड्रेगन ट्रेन का लुत्फ उठाया। मेले का यह परिसर सर्वाधिक भीड़-भाड़ वाला रहा। यहां पुलिस का माकूल बंदोबस्त रहा।

कलेजे ने जगह छोड़ दी हो जैसे-
नाव में झूलने का लुत्फ उठाकर नीचे उतरे युवा दंपति सिमरन व हितेश ने बताया कि नीचे से ऊंचाई पर जाते समय तो झांई नहीं छूटती, लेकिन जैसे ही ऊंचाई से नीचे की ओर आते हैं, तो एकदम लगता है कि जैसे कलेजे ने जगह छोड़ दी हो। इस अहसास को बयां नहीं किया जा सकता। हवाई झूले का आनंद भी अलग ही है।

इनका भी रहता है क्रेज-
मेले में कुछ ऐसी चीजें भी आती है, जो हमारे शहर या कस्बे में आम दिनों में देखने को नहीं मिलती। जैसे टेटू गुदवाना, बंदूक से गुब्बारे फोड़ना, रिंग में वस्तु फंसाना, परात में नाव चलाना, अपने नाम का छल्ला बनवाना आदि-आदि। मेले में घूमने के दौरान ये चीजें अपनी ओर सबका ध्यान खींच लेती है। खासकर युवाओं में टेटू को लेकर खासा क्रेज है। जो अपने  हाथ समेत शरीर के अन्य अंगों पर टेटू गुदवाने में पीछे नहीं रहते हैं।

वाहनों की लम्बी कतारें-
प्रवेश के तीनों रास्तों पर वाहन पार्किंग की व्यवस्था है। लेकिन चार पहिया वाले छोटे वाहनों को बाजार में ही दुकानों के सामने पार्क किया जाता है। रविवार को अवकाश की वजह से मेले में सर्वाधिक भीड़ रही। इससे मैन मार्केट, अस्पताल रोड, जनता सिनेमा मार्केट, मैन मार्केट, मांगरोल रोड आदि में सड़क के दोनों ओर कार, ट्रेक्टर-ट्रॉली आदि की दूर-दूर तक लम्बी कतारें रही।

कौमी एकता की मिसाल बन रहा मेला-
बारां डोल मेला कौमी एकता की मिसाल भी कायम रखता है। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई समेत सभी धर्मों के लोग परिवार सहित मेले में पहुंचकर लुत्फ उठा रहे हैं। मेले में व्यापारियों के साथ-साथ फुटकर, ठेला, थड़ी लगाकर सामान बेचने वालों समेत झूले-चकरी के संचालक दोनों ही समुदायों से जुड़े हैं। बावजूद मेले में एकदूसरे के सहयोगी व साझेदार बनकर कार्य कर रहे हैं।