जयपुर। भारत के 15वें राष्ट्रपति को चुनने के लिए आज मतदान हो रहा है। राष्ट्रपति पद के दावेदार एनडीए से द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के यशवंत सिन्हा आमने सामने हैं। रूझानों के मुताबिक द्रौपदी मुर्मू इस राष्ट्रपति के चुनाव को आसानी से जीतते हुए नजर आ रही हैं। वहीं विपक्ष के उम्मीदवार यशवन्त सिन्हा ने इस चुनाव में एनडीए पर पैसे का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। वहीं, सिन्हा ने चुनाव में एजेसिंयो के भी गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
आइये इस चुनाव से संबधित आपको महत्वपूर्ण तथ्य बताते हैं—
राष्ट्रपति का चुनाव संसद के मानसून सत्र के पहले दिन के साथ शुरू हुआ है। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू, 2017 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले देश के सर्वोच्च पद के लिए एक मजबूत दावेदार थी।
मुर्मू की एनडीए की पसंद - ओडिशा की एक आदिवासी महिला और झारखंड की पूर्व राज्यपाल - को एक सोची समझी चाल के रूप में देखा जाता है, जिसे न केवल झारखंड के सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा, बल्कि ओडिशा के नवीन पटनायक का भी समर्थन प्राप्त है।
एनडीए ने आगामी लोकसभा चुनावों में आदिवासी और दलित का दांव खेलकर द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। मुर्मू को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भी समर्थन का आश्वासन दिया गया है। वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों धड़े मुर्मू का समर्थन करने जा रहे हैं।
भाजपा से संबद्ध एकनाथ शिंदे गुट जहां एनडीए उम्मीदवार का समर्थन कर रहा था, वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला धड़ा भी उनका समर्थन कर रहा है.
ठाकरे गुट, पहले विपक्षी उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन कर रहा था लेकिन उन्होनें 16 सांसदों के उद्धव ठाकरे से मिलने के बाद स्विच करने का फैसला किया और सुझाव दिया कि उन्हें मुर्मू को वोट देना चाहिए। सिन्हा ने दावा किया है कि ठाकरे को सुश्री मुर्मू का समर्थन करने के लिए बाध्य किया गया है।