खोह में जगह न मिलने के कारण आदिबद्री धाम में दो दिन का डाला पड़ाव

डीग, ( राधा रानी ब्रज यात्रा ) शासन प्रशासन से लंबे समय से धार्मिक जगत व ब्रजवासियों की माँग रही है कि ब्रज भूमि सारे जगत की आराध्या व पतित पावनी है, हमारी संस्कृति की मूलाधार है दुर्भिक्ष उपेक्षित है । करोड़ों लोग प्रति वर्ष यहाँ आकर यहाँ की धूल अपने मस्तक पर चढ़ाकर अपने को अहोभाग्य मानते हैं । हमारी यात्रा में भी 10000 से अधिक यात्री प्रति वर्ष रहते हैं । राधा रानी ब्रज यात्रा का पड़ाव खोह में था परंतु कहीं जगह नहीं मिली, इस कारण नयन सरोवर व जड़ख़ोर दोनों स्थान छोड़ दिये ।उनके संदर्भ में संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष राधा कान्त शास्त्री ने यात्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुहाना गो दृष्टि वन है, जहां से श्री कृष्ण गायों पर दृष्टि रखा करते हैं।

बूढ़े बद्री बद्रीनाथ हैं ।यहीं अलख नंदा है सब के तो आपने दर्शन किये।पास में ही नयन सरोवर और जड़ख़ोर में कई दर्शनीय स्थल हैं ।जिनमें सौगन्धनी शिला बहुत महत्व पूर्ण है । यहीं श्री कृष्ण ने प्रतिज्ञा की थी कि मैं ब्रजवासियों को कभी नहीं छोड़ सकता ।( ब्रजवासी मंगल सदा मेरे जीवन प्राण । इन्हें कबहुँ न विसारियों मोहे नंद बाबा की आन । खोह में कितने ही द्वार यात्रा के स्वागत में बनाये गये ।ब्रजवासियों में बढ़ चढ़कर आतिथ्य किया । खोह के बाद नीलघाटी  होकर विश्राम स्थल आदि बद्री यात्री पहुँचे । दो दिन के बाद यात्रा 25 को केदार नाथ जाएगी ।