सरकारी नीतियों के विरोध में भारत बंद का असर, बैंकिग सहित कई सेवाएं प्रभावित

जयपुर। सरकारी नीतियों का विरोध करने के लिए बैंकिंग कर्मचारियों सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा भारत बंद आह्वान किया गया जो 48 घंटे तक रहेगा। भारत बंद आह्वान के बाद आज कई राज्यों में इसका असर दिखाई दिया जिससे जिससे कुछ क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
बैंकिग सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कर्मचारियों के एक वर्ग के ड्यूटी पर नहीं आने से बैंकिंग सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित हुईं। कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लेन-देन प्रभावित हुआ और चेक क्लीयरेंस में देरी हुई। हालांकि प्राइवेट सेक्टर की बैंको में इसका असर कम देखने को मिला है।
पूर्वी भारत में असर ज्यादा
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि हड़ताल का असर पूर्वी भारत में प्रमुख है क्योंकि वहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कई शाखाएं बंद हैं। उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों में शाखाएं खुली हैं क्योंकि अधिकारी मौजूद हैं लेकिन हड़ताल में कई कर्मचारियों के भाग लेने के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

बता दें कि इस साल के केंद्रीय बजट में घोषित सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के सरकार के कदम का बैंक संघ विरोध कर रहे हैं। साथ ही कर्मचारी जमा पर ब्याज दर में वृद्धि और सेवा शुल्क में कमी की भी मांग कर रहे हैं।
भारत बंद का असर सबसे ज्यादा केरल राज्य में जहां ट्रेड यूनियनों का काफी बोलबाला है, सुनसान नज़र आ रही थी, और केवल कुछ निजी वाहन ही देखे जा सकते थे।

अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस महासचिव अमरजीत कौर ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वे देश भर में श्रमिकों की सामूहिक लामबंदी के साथ 20 करोड़ से अधिक औपचारिक और अनौपचारिक श्रमिकों की भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पूरे कोयला खनन क्षेत्र के श्रमिक विरोध में शामिल हो गए हैं।
रेलवे और रक्षा क्षेत्र की यूनियनों के भी सैकड़ों स्थानों पर हड़ताल के समर्थन में लामबंद होने की उम्मीद है। रोडवेज, परिवहन कर्मचारियों और बिजली कर्मचारियों के अलावा स्टील, तेल, दूरसंचार, कोयला, डाक, आयकर, तांबा और बीमा जैसे क्षेत्रों के कर्मचारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है।