जयुपर। मंगलवार को संसद के उच्च सदन में आधार को वोटर आईडी से जोड़ने वाला विधेयक पारित हो गया। वहीं, विपक्ष ने इसके विरोध में सदन से वॉक आउट किया। विपक्ष चाहता था कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाए। हालांकि सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया। 'चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक 2021 लोकसभा में सोमवार को संक्षिप्त बहस के बाद पारित हुआ।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून
'चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक 2021 लोकसभा और राज्य सभा दोनों में पारित होने के बाद अब मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जायेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि चुनाव कानून 2021 का संशोधन विधेयक बिना किसी "चर्चा या बहस" के पारित किया गया था। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र का मजाक' करार दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्विटर पर लिख कि, "मोदी सरकार ने बिना किसी चर्चा या बहस के चुनाव कानून 2021 संशोधन विधेयक पारित किया है। यह बिल एससी पुट्टस्वामी के फैसले का उल्लंघन है और इससे बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित हो जाएगा। इसे बिना किसी चर्चा या जांच के कैसे पारित किया जा सकता है। यह हमारे लोकतंत्र का मजाक है!"
वहीं सरकार का मानना है कि यह विधेयक अलग-अलग स्थानों पर एक ही व्यक्ति के कई नामांकन की बड़ी समस्या को दूर करेगा और मतदाता सूची को काफी हद तक ठीक करने का काम करेगा। साथ ही कहा कि विधेयक में विभिन्न चुनावी सुधार शामिल हैं जिन पर लंबे समय से चर्चा हुई है। साथ ही जिन मतदाताओं के नाम एक से अधिक मतदाता सूची में या एक ही मतदाता सूची में एक से अधिक बार आते हैं, उनकी संभावना को हटाया जा सकता है,