जयपुर। लोकसभा में आज विपक्ष के भारी विरोध के बीच "चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक" पारित कर दिया गया। इस संशोधित विधेयक में मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोड़ने की बात कही गई है। सरकार के इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने भारी विरोध जताया है। विपक्षी दलों का कहना है कि कहा कि आधार कार्ड को किसी के वोटर आईडी या चुनावी कार्ड से जोड़ने से देश में अधिक गैर-नागरिक मतदान हो सकता है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में इस विधेयक के विरोध में बोलते हुए कहा कि "आधार कार्ड निवास का प्रमाण है यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यदि आप मतदाता के लिए आधार कार्ड मांग रहे हैं, तो आपको केवल एक दस्तावेज मिलता है जो निवास को दर्शाता है। आप संभावित रूप से गैर-नागरिकों को मतदान का अधिकार दे रहे हैं।
वहीं कांग्रेस के एक अन्य नेता मनीष तिवारी ने कहा, "मतदान एक कानूनी अधिकार है। आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना गलत है।" चुनावों में इसका गलत फायदा उठाया जा सकता है।
तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगतो रॉय ने भी सरकार के इस फैसले पर विरोध दर्ज किया और कहा कि "केंद्र सरकार चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रही है। मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं।"
अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की मांग
चुनाव सुधार कानून के विरोध के अलावा विपक्षी सांसदों ने उत्तर प्रदेश में किसानों को कुचलने के आरोप में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने की मांग करते हुए लगातार नारेबाजी की
वहीं सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को गुमराह और निराधार बताया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'सरकार फर्जी वोटिंग और फर्जी वोटिंग को रोकना चाहती है। ऐसे में विपक्ष को सरकार का समर्थन करना चाहिए।' बहस और नारेबाजी के चलते सदन की कार्यवाही करीब दो घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।