संवाददाता शिवकुमार शर्मा
कोटा 29 दिसम्बर। गौतम वाटिका में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक पं.भुवनेश शर्मा (श्याम जी) ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालुओं भक्ति छलक पड़ी, श्रीकृष्ण-रुक्मण बने बाल कलाकारों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया, जहां शास्त्री जी ने ‘‘तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे, तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवर... भजन सुनाया तो पांडल में उपस्थित भक्त थीरकने लगे।
प्रसंग में शास्त्री ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया।
इस दौरान कथा में संदीप शर्मा विधायक कोटा, पार्षद शालिनी गौत, कथा के मुख्य यजमान जगमोहन गौतम, कुन्जबिहारी गौतम, प्रवीण पंचौली, राजेन्द्र मोहन गौतम, मोहित गौतम, राम गौतम, दिनेश शर्मा, रमेश चन्द्र गौतम सहित बड़ी संख्या मे श्रद्धालु उपस्थित रहे।