जयपुर। कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थाओं से शुरू हुआ हिजाब विवाद में अब पाकिस्तान और अमेरिका ने भी एंट्री ले ली है। वहीं अब भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से दोनों देशों को जबाव देते हुए कहा गया कि उन्हें भारत के आंतरिक मामलों में दखलअंजादी बर्दाशस्त नहीं है।
दरअसल पहले पाकिस्तान ने भारत के हिजाब नहीं पहनने वाले फैसलों को मुस्लिम विरोधी बताया साथ ही पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिक को समन भेजा और भारत के राजनयिक से अपील की है कि वे भारत सरकार को हिजाब विरोधी कैंपेन के प्रति पाकिस्तान की गंभीरता से अवगत कराएं। पाकिस्तान के मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी इस मामले में भारत की आलोचना कर चुके हैं।
अब अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता मामले के राजदूत (US Ambassador At-Large for International Religious Freedom) राशद हुसैन (Rashad Hussain) ने ट्विट करके कहा कि किसी भी व्यक्ति को मजहबी पोशाक पहनने की आजादी दी जानी चाहिए। इस मामले में कर्नाटक सरकार को इस पर फैसला नहीं करना चाहिए कि कोई मजहबी पोशाक पहने या नहीं। भारतीय मूल के हुसैन ने अपने आधिकारिक ट्विटर से ऐसा बयान दिया।
अमेरिका की जो बाइडेन सरकार के इस अधिकारी ने ट्वीट में लिखा, ‘अपनी मजहबी पोशाक पहनना भी धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा है। भारतीय प्रदेश कर्नाटक को मजहबी पहनावे की अनुमति निर्धारित नहीं करनी चाहिए. स्कूलों में हिजाब पर पाबंदी मजहबी आजादी का हनन है और महिलाओं एवं लड़कियों के लिए खास धारणा बनाती है और उन्हें हाशिये पर धकेलती है’।
भारत का जबाव
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने मामले को लेकर कहा है कि कर्नाटक राज्य में कुछ शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड से संबंधित मामला कर्नाटक के हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक परीक्षण के अधीन है। उन्होंने साफ कहा है कि भारत के आंतरिक मसलों पर प्रेरित कॉमेंट्स का स्वागत नहीं है।