साबरमती आश्रम को तोड़ने के फैसले पर गहलोत नाराज, गुजरात सरकार का फैसला बताया गलत

जयपुर। सूबे के मुखिया अशोक गहलोत ने गुजरात सरकार द्वारा साबरमती आश्रम को तोड़ने और पुनर्निमाण के फैसले पर विरोध किया है। मुख्यमंत्री ने दो टूक जबाव देते हुए कहा है कि गुजरात सरकार गलत कर रही है। उन्हें ट्विटर के माध्यम से गुजरात सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि गुजरात सरकार द्वारा गांधी द्वारा स्थापित साबरमती आश्रम को तोड़कर संग्राहलय बनाना एक चौकाने वाला फैसला है। और यह सरकार का अनुचित फैसला भी है।

बता दें कि गुजरात सरकार ने साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना के तहत साबरमती आश्रम को तोड़कर वहां संग्राहलय बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है​ कि देश विदेश से लोग साबरमती आश्रम पर आकार यह देखते हैं कि महात्मा गांधी जी कितने साधारण और सरल तरीके से अपनी जिंदगी ​जीते थे। उन्होंने कहा है कि लोग यहां सरकार द्वारा अब बनायी जाने वाली किसी बिल्डिंग को देखने नहीं आयेंगे।

साबरमती का इतिहास
बता दें कि गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से अपनी पढाई पूरी कर लेने के बाद भारत आये और उन्होंने सादा जीवन व्यतीत करने के लिए, खेती बाड़ी, पशुपालन जैसा कार्य करने के लिए 17 जून 1917 में साबरमती नदी के किनारे आश्रम को स्थापित किया। गांधी जी ने यहां रहते हुए 1930 तक स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी। अंग्रेजो ने देश में नमक क़ानून पारित किया था, उस समय महात्मा गांधी ने इसी स्थान से दांडी मार्च किया था और दांडी पहुँच कर नमक क़ानून तोड़ा था। इस तरह से यह स्थान कई लोगों के लिए एक आदर्श स्थल बन गया, जहाँ पर गांधी जी के करीबी अनुयायी भी रहते थे।