पति-पत्नी फिर से रहने लगे साथ, लोक अदालत बनी माध्यम
बूंदी, 6 दिसंबर। न्यायालय की ओर से तलाक की डिक्री पारित होने के बाद लोक अदालत में हुई समझाइश से पति-पत्नी फिर से प्रेमपूर्वक अपना जीवन गुजार रहे है। लोक अदालत में आपसी समझाइश से निस्तारित हुआ यह प्रकरण अपने आप में अनूठा और समाज के लिए मिसाल कायम करने वाला है।
पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने बताया कि 9 नवंबर 2015 को कुलदीप और भावना का विवाह हुआ था। विवाह के बाद लगभग 04 वर्ष तक दोनों साथ रहे और इस दौरान उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। इसके बाद किसी बात को लेकर दोनों के बीच मनमुटाव होने से भावना अपने पीहर चली गई। भावना के पीहर रहने के दौरान ही कुलदीप वर्ष 2019 में लकवाग्रस्त हो गया और न्यायालय की ओर से 12 फरवरी, 2021 को कुलदीप के पक्ष में एकतरफा तलाक की डिक्री पारित कर दी गई। पत्नी को जब बाद में पता लगा तो उसने न्यायालय के समक्ष उक्त एकपक्षीय डिक्री को खत्म करने के लिए प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने दोनों पति-पत्नी के मध्य लगभग 6 महीने तक लगातार समझाईश का प्रयास किया गया। इसके फलस्वरूप दोनों के मध्य राजीनामा संभव हुआ तथा आज दोनों आपस में प्रेमपूर्वक साथ-साथ निवास कर रहे।
निसंदेह इस तरह का मामला जिसमें कि न्यायालय द्वारा तलाक़ की डिक्री पारित कर दी गई हो और उसके पश्चात पक्षकार पुनः पति-पत्नी की तरह साथ-साथ निवास करें आश्चर्यजनक है और यह सब लोक-अदालत के माध्यम से ही सम्भव हो सका है ।
ब्यूरो चीफ़ शिवकुमार शर्मा
कोटा संभाग