जयपुर। चारधाम प्रोजेक्ट के तहत यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ बौर बद्रीनाथ को जोडने वाली सडकों का निर्माण किया जा रहा है और कुछ सडकों को चौडा किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश किसी भी मौसम में उपरोक्त चारों देवस्थानों पर बिना रूकावट के जाना है।
सडकों को चौडी करने के लिए कईं सारे पेडों को काटा जा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है और पहाडी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ रहा है। इसके चलते एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिक दायिर की थी, जिसकी सुनवाई करते हुए उत्तराखंड में चार धाम यात्रा से जुड़ी तीन सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने को सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना है। कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है। हाल के दिनों में सीमा पर हुई घटनाओं को देखते हुए इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
सरकार की तरफ से केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हम नहीं चाहते कि हमारे देश की हालत 1962 जैसी हो। हमारे सैनिक पैदल चलें। क्योंकि चीन बॉर्डर पर जानें के लिए सडकों की चौडाई की जरूरत है ताकि सैन्य सामान लाने और ले जाने में कोई दिक्कत ना हो। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा- चीन की तरफ से हवाई पट्टी, हेलीपैड, टैंकों, सैनिकों के लिए बिल्डिंग्स और रेलवे लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। टैंक, रॉकेट लांचर और तोप ले जाने वाले ट्रकों को इन सड़कों से गुजरना पड़ सकता है, इसलिए सड़क की चौड़ाई 10 मीटर की जानी चाहिए।
इसी बात पर कोर्ट ने कहा कि हम नहीं चाहते कि भारतीय सैनिक 1962 के हालात में हों, लेकिन रक्षा और पर्यावरण दोनों की जरूरतें संतुलित होनी चाहिए।