जयपुर। मंकीपॉक्स के नये मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। जर्मनी ने यूरोप में इस बिमारी को अब तक के "सबसे बड़े प्रकोप" के रूप में वर्णित किया है। बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं।
पहले यूरोपीय मामले की पुष्टि 7 मई को नाइजीरिया से इंग्लैंड लौटे एक व्यक्ति में हुई थी। तब से, यूरोप में इस दुर्लभ वायरल संक्रमण के 100 से अधिक मामलों सामने आ चुके हैं।
हालांकि, वैज्ञानिकों को लगता है कि मंकीपॉक्स का प्रकोप कोविड-19 जैसी महामारी में विकसित नहीं होगा क्योंकि यह वायरस सार्स-सीओवी-2 जितनी आसानी से नहीं फैलता है। जर्मनी में रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के एक शोधकर्ता फैबियन लेन्डर्ट्ज़ ने प्रकोप को एक महामारी के रूप में वर्णित किया। वैज्ञानिकों ने कहा कि "हालांकि, यह बहुत कम संभावना है कि यह महामारी लंबे समय तक चलेगी। वहीं इस वायरस के लिए ऐसी दवाएं और प्रभावी टीके भी हैं जिनसे इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, मंकीपॉक्स के लिए कोई विशिष्ट टीका नहीं है, लेकिन डेटा से पता चलता है कि चेचक को मिटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टीके मंकीपॉक्स के खिलाफ 85% तक प्रभावी हैं।
मंकीपॉक्स क्या है?
मंकीपॉक्स मानव चेचक के समान एक दुर्लभ वायरल संक्रमण है और इसे पहली बार 1958 में अनुसंधान के लिए रखे गए बंदरों में खोजा गया था। मंकीपॉक्स का पहला मानव मामला 1970 में दर्ज किया गया था। यह रोग मुख्य रूप से मध्य और पश्चिम अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन क्षेत्रों में होता है और कभी-कभी अन्य क्षेत्रों में निर्यात किया जाता है।