जयपुर एक गुलाबी नगरी
अतुल्य संसार
जयपुर |
विश्व भर में विख्यात गुलाबी नगर के नाम से जयपुर शहर को जाना जाता है इसकी स्थापना महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने की थी इस नगर का प्रारूप विद्वान प्रारूपकार विध्याधर भट्ट ने बनाया था । जयपुर एक रोमांचक नगर है जोकि पर्यटन की दृष्टि से अनेकों विशेषतायें लिये हुए है
इस नगर की स्थापना के समय ही तत्कालीन महाराजा ने इस बात की परिकल्पना की थी कि यह नगर विश्व में अनूठा और अनेक कलाओं में अग्रणी रहे। साथ ही प्रमुख व्यापारिक केन्द्र भी बने। इसी उद्देश्य से यहां अनेक कलाओं में निपुण विशेषज्ञों को आमंत्रित कर बसाया गया उन्हें राज आश्रय भी दिया गया ताकी वे अपनी कला को मूर्त रूप दे सके उसी का परिणाम है कि आज यहां शिल्पकला , पेंटिंग ब्लू पॉटरी, हाथीदांत और नक्काशी के अलावा रत्न आभूषण उद्योग विश्व प्रशिद्ध है
यहां के दुर्ग, महल, द्वार, मन्दिर संग्रहालय और हवेलियाँ उत्कृष्ट स्थापत्यकला के प्रतीक हैं इन्हें देखने वाले आज भी इनकी प्रंशसा किये बिना नहीं रह सकते । यहां के स्थापत्य पर मुगल और राजपूताना शैली की स्पष्ट छाप दिखाई देती है यहां के प्रत्येक भवन पर की गई गुलाबी रंग की पुताई इस नगर को "गुलाबी नगर" कहलाने में सहायक सिद्घ होते हैं यहां के मुख्य बाज़ार चौपडरूपी चौराहों से जुड़े हुए हैं साथ ही गलियाँ भी इतनी सीधी और सरल हैं कि कोई भी अनजान व्यक्ति चाहे किसी भी गली में चला जाये वो घूम फिरकर मुख्य सड़क पर आ ही जाता है
प्राकृतिक शुष्मा के प्रतीक बने यहाँ के बाग़ बगीचे भी शैलानियों को खूब लुभाते हैं नक्षत्रों का अध्धयन करने के लिए जंतर मंतर नामक वेधशाला है साथ ही पूजा अर्चना करने के लिए अनेक श्रद्धा स्थल भी बने हुए हैं जयपुर दक्षिण दिशा को छोड़कर सभी तरफ से अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है वहीँ जयपुर शहर से सात मील दूर उत्तर - पूर्व में आमेर है | जो जयपुर के पूर्व राजवंश कछवाहों की राजधानी रहा है वैसे तो वर्ष भर शैलानी यहाँ घूमने आते जाते रहते हैं लेकिन सितम्बर से अप्रैल तक का मौसम अधिक अनकूल रहता है यहाँ पर घूमने के लिए बहुत ही सुन्दर स्थल बने हुए हैं जो बाहरी सैलानियों को खूब मोहित करते हैं इनमें हवामहल और जलमहल अपनी बिशिस्ट पहचान लिए हुए हैं यहाँ के बाज़ारों में राजस्थानी पोशाक और जयपुरी चूंदड़ी अधिक विख्यात हैं यहाँ पर धार्मिक स्थलों में गोविन्द देव जी मंदिर और मोतीडूंगरी गणेश मंदिर साथ ही साथ बिड़ला मंदिर आदि अनेक स्थल हैं जो यहाँ पर विधमान हैं जो जयपुर की शोभा में चार चाँद लगाने के साथ साथ लोगों की आस्था का स्थल बने हुए हैं |