चारा घोटाले मामले में लालू प्रसाद यावद को 5 साल की सजा सुनाई गई, 60 लाख का जुर्माना भी लगाया

जयपुर। रांची सीबीआई की विशेष अदालत ने डोरंडा कोषगार के चारे घोटाले मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को 5 साल जेल की सजा सुनाई है। इसके अलावा विशेष अदालत ने लालू प्रसाद पर 60 लाख जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि इस मामले में 1990 के दशक में हुए चारा घोटाले में डोरंडा कोषागार से ₹ 139.5 करोड़ की अवैध निकासी शामिल है, जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे।
तीन बार के मुख्यमंत्री यादव सहित 39 अन्य लोगों के इस मामले दोषी पाया गया था। जमानत पर बाहर और अस्वस्थ चल रहे लालू यादव वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुए। लालू प्रसाद का केस लड़ रहे वकील ने कहा कि, "जमानत के लिए आगे अर्जी दी जायेगी, लेकिन तक लालू प्रसाद यादव को जेल में ही रहना पडेगा।"

5वां चारा घोटाला
लालू प्रसाद डोरंडा घोटाले से पहले चार अन्य चारे घोटालों में दोषी पाये जा चुके हैं। चाईबासा कोषागार से ₹37.7 करोड़ का गबन और ₹33.13 करोड़ का गबन, देवघर कोषागार से ₹89.27 करोड़ रूपये का, और राज्य से दुमका कोषागार से ₹3.76 करोड़ रूपये का गबन शामिल है। दुमका मामले में लालू प्रसाद यादव पर ₹ 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था। इन सभी केसों में कुल 14 साल जेल की सजा सुनाई गई है। 42 महिने की जेल के बात लालू यादव जमानत पर चल रहे थे।

वहीं चारा घोटाले से जुड़ा एक और मामला पटना की सीबीआई कोर्ट में लंबित है। मामला बैंक-भागलपुर कोषागार से अवैध रूप से पैसे निकालने से संबंधित है। 950 करोड़ के चारा घोटाले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार शामिल था जिसमें पूरे बिहार में कई सरकारी कोषागारों से पशुओं के चारे के लिए धन का गबन किया गया था। पशुपालन विभाग ने कथित तौर पर घोटाले को बढ़ावा देने के लिए फर्जी बिल जारी किए। लालू यादव ने चार मामलों में अपनी सजा को चुनौती दी है.