सांप्रदायिक तनाव पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर विपक्षी दल हमलावर, हिंसा के अपराधियों के लिए कडी सजा की मांग की

जयपुर। देश के 13 विपक्षी दलों ने आज शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए एक संयुक्त अपील जारी की और सांप्रदायिक हिंसा के अपराधियों के लिए कड़ी सजा की मांग की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्षी दलों ने हमला बोला और कहा कि देश में सांप्रदायिक हिंसा हो रही है और प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए है। विपक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों को के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला जो कट्टरता का प्रचार खुलेआम करते हैं और भडकाउ भाषणों से समाज को उकसाते हैं।

विपक्षी दलों ने बयान जारी करते हुए कहा कि, "यह चुप्पी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि इस तरह की निजी सशस्त्र भीड़ को आधिकारिक संरक्षण का आनंद मिलता है।"

इस सयुंक्त अपील में 13 विपक्षी दलों के हस्ताक्षर किया जिसमें कांग्रेस, तृणमूल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, माकपा, द्रमुक, राजद और अन्य सहित अधिकांश प्रमुख विपक्षी दल शामिल हैं। मजे की बात यह है कि इस सूची में शिवसेना और आम आदमी पार्टी का नाम नहीं है।

इसमें कहा गया है, "जिस तरह से हमारे समाज का ध्रुवीकरण करने के लिए सत्ता प्रतिष्ठान के वर्गों द्वारा जानबूझकर भोजन, पोशाक, आस्था, त्योहारों और भाषा से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे हम बेहद दुखी हैं।"

अपील ने स्पष्ट रूप से राज्य पर उन लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाया जो भड़काऊ भाषण देते हैं और इसमें लिप्त होते हैं। बयान में कहा गया है, "हम देश में ऐसे लोगों द्वारा अभद्र भाषा की बढ़ती घटनाओं से बेहद चिंतित हैं, जिन्हें आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है और जिनके खिलाफ कोई सार्थक और कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है।