कोटा वर्कशाप में देशभक्तिपूर्ण कवि सम्मेलन का किया गया आयोजन
कोटा। माल डिब्बा मरम्मत कारखाना कोटा में 30 दिसम्बर को "एक शाम शहीदों के नाम" की परिकल्पना के आधार पर देशभक्ति की थीम पर आधारित कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम मुख्य कारखाना प्रबन्धक सुधीर सरवरिया की प्रेरणा एवं नेतृत्व में आयोजित किया गया। सुधीर सरवरिया ने बताया कि राजभाषा विभाग के सौजन्य से रेल परिवार की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने एवं प्रोत्साहन हेतु मात्र रेल परिवार से ही कवियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। सुधीर सरवरिया के द्वारा इस अवसर पर समस्त कवियों को श्रीफल एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया।
इस कार्यक्रम का शुभारंभ मॉ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्वलन एवं माल्यापर्ण के साथ किया गया। इस दौरान रेल परिवार के कवि देशबंधु मीणा के द्वारा सुमधूर वाणी में सरस्वती वंदना की गयी। कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठित लेखक एवं कवि, रेलवे से ही सेवानिवृत्त सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर रघुराज सिंह 'कर्मयोगी' के द्वारा अपने चिरपरिचित अंदाज़ में किया गया। आपने अपनी पंक्तियों "आज हम आज़ाद है, शहद सा घुलता कानों में। आज़ादी का राज दिया है, वीरों के बलिदानों में" के साथ कवियों को आमंत्रित किया। कार्यक्रम में कारखाने के कवि कर्मचारी ओमप्रकाश सिंह, वरि अनु.इंजी. एवं देशबन्धु पांडे कार्यालय अधीक्षक ने ओजपूर्ण काव्यपाठ कर उपस्थित श्रोताओं की तालियों का मुक्तकंठ से प्रतिसाद पाया।
सलीम 'स्वतंत्र' के द्वारा देशभक्तीपूर्ण कविता और हिंदी गज़ल को पेश किया गया। इसके अलावा दीपक शर्मा मुख्य टिकिट निरीक्षक, टी.एस. हाडा, मुख्य कार्यालय अधीक्षक / टीआरडी ने भी काव्यपाठ किया। कोटा की लब्ध-प्रतिष्ठित शायरा रौनक खान के ने भी इस अवसर पर अपने शेरों से सबका मन जीत लिया। आपकी पंक्तियों "जब-जब भी शहीदों की हमने सुनी कहानी है, खौल उठा है खुन हमारा, और आंखों में पानी है। ज़रा पुछिये उन लोगों से, जिनने पूत गंवाये हैं, हंस कर जिनको विदा किया, वो लौट कर घर ना आये हैं" को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रज्ञेश निम्बालकर उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर के द्वारा की गयी।