-समय को अपनी दवा बनने दें, बनें एक सर्केडियन डॉक्टर
शाहपुरा न्यूज - अधिकांश शिशुओं का जन्म रात 1.30 बजे से सुबह 6.30 बजे के बीच होता है, जबकि दिल का दौरा, स्ट्रोक और कार्डियक अरेस्ट की ’यादातर घटनाएं सुबह 6.30 से दोपहर 12.30 बजे के बीच अधिक होती हैं। इसी तरह, जो लोग रात की नौकरी करते हैं, उनमें दिन में काम करने वालों की तुलना में कैंसर का खतरा 5 प्रतिशत अधिक होता है। इसे ही सर्केडियन रिद्म या लय कहा जाता है। मानव शरीर की सर्केडियन क्लॉक शरीर में रासायनिक प्रतिक्रिया पूर्व-निर्धारित समय के आधार पर होती है और इसमें फेरबदल हमें अस्वस्थ करता है। प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने अपनी नई किताब, द सर्केडियन डॉक्टर के विमोचन में इसकी जानकारी दी।
साक्ष्य आधारित टिप्स बताए
डॉ. बिस्वरूप ने बताया कि सर्केडियन क्लॉक को ठीक करने से कई पुराने और दिनचर्या संबंधी रोगों से बचने में मदद मिलती है। पुस्तक में कई साक्ष्य आधारित टिप्स दिए गए हैं। द सर्केडियन डाइनिंग टेबल का नियम सुबह 8 से शाम 6 बजे के बीच, 10 घंटे की अवधि में भोजन करने के बारे में है। शाम 6 से सुबह 8 बजे के बीच कुछ भी खाने से बचें। इस नियम को अपनाने के 72 घंटों के भीतर ही ब्लड रिपोर्ट में सुधार हो सकता है।
जीवनशैली की बीमारियों से बचें
किताब डॉ. बीआरसी के सर्केडियन चार्ट के वैज्ञानिक आधार की व्याख्या करती है, जो 72 घंटे का एक प्रोटोकॉल है जिसका राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा शिविरों में पालन किया जा रहा है। समझने में सरल यह पुस्तक रोगियों को अपना स्वयं का सर्केडियन चार्ट तैयार करने और पुरानी व जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से छुटकारा पाने में मदद कर सकती है।
पोषण का गणितीय मॉडल बताया
डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी पोषण के गणितीय मॉडल के जनक हैं, जिसे डीआईपी आहार के रूप में जाना जाता है। यह भारत (आयुष मंत्रालय), नेपाल (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय), और मलेशिया (लिंकन यूनिवर्सिटी) में कई परीक्षणों के माध्यम से डायबिटीज, उ‘च रक्तचाप, मोटापा, हड्डी के रोगों और क्रोनिक किडनी रोगों में प्रभावी साबित हुआ है।