जयपुर। भले ही तालीबान ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया हो, लेकिन अफगानिस्तानी लोगा अभी हार मानने वाले नहीं है। जहां एक तालीबान काबुल में कब्जा जमाकर अपनी सरकार बनाने के सपने देख रहा है, वहीं दूसरी अफगानिस्तान के कुछ जिलों में तालीबानी लडाकों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। ऐसी खबर सुनकर तालिबान को निश्चित रूप से झटका लगा है। ऐसे में कहा जा सकता है अभी अफगानिस्तान में सरकार बनाने की पिक्चर अभी बाकी है।
एक स्थानीय न्यूज एजेंसी के मुताबिक, स्थानीय गुटों ने वीरता से तालिबान से लड़ते हुए बाघलान प्रांत के तीन जिलों को तालीबान से मुक्त करा लिया है। ये तीन जिले पोल ए हेसर, हेड सहाल व बानो हैं। यहां के स्थानीय तालीबानी विरोधी गुटों को तालीबान के कईं लडाकों को मौत के घाट उतार दिया है।
चूकिं सरकार बनाने के चक्कर में तालीबान मुख्य रूप से काबुल में जमा है। ऐसे में अन्य प्रांतों में तालीबान के जो लड़ाके हैं उनको कोई मार्गदर्शन और आदेश नहीं मिल पा रहा है, जो लडाकों के लिए मौत की वजह बन रही है।
बता दें कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी समेत कईं बड़े नेता देश छोडकर पलायान कर चुके हैं। तो ऐसे में अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने खुद को अफगान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है। और उन्होंने तालीबान के साथ संघर्ष जारी रखने का एलान कर दिया है। अमरुल्लाह सालेह ने अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद और बल्ख प्रांत के पूर्व गवर्नर अता मुहम्मद नूर के साथ मिलकर तालीबानीयों सबक सिखाने की ठान ली है।