पद मायने नहीं रखता, हाई कमान जो भी फैसला करे मंजूर: अशोक गहलोत

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कल सोनिया गाँधी मिलने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने से मन कर दिया था। जिसके बाद राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के गांधी परिवार के आशीर्वाद के साथ "आधिकारिक" चुनाव के रूप में कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ शामिल हो गए हैं। आज राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वह अक्टूबर के लिए अपने नामांकन में खड़गे के प्रस्तावक होंगे। उन्होंने दोहराया कि राजस्थान की गड़बड़ी उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी है। उन्होंने कहा, "मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं हैं। आलाकमान जो भी फैसला करेगा मैं वह करूंगा।" उन्होंने कहा कि वह अब आधी सदी से विभिन्न पदों पर हैं।

बता दें की गहलोत, जो की शुरू में कांग्रेस प्रमुख की दौड़ में शामिल थे और गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद भी माने जाते हैं। लेकिन राजस्थान में हुए घटना क्रम के बाद उन्होंने कल कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और चुनाव से बाहर होने की घोषणा करने से पहले उन्हें एक माफी पत्र सौंपा।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र पर सवालिया निशान है क्योंकि सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का 'दुरुपयोग' किया जा रहा है।