राष्ट्रीय लोक अदालत में 800 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण कर शीघ्र न्याय प्रदान किया।
“लोक अदालत लगी जिले में, प्रत्येक पक्षकार ने बात ये मानी, झगड़ों को जड़ से मिटाया, बिछड़े अपनों को फिर से मिलाया”। आज जिलेभर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में उक्त पंक्तियां चरितार्थ हुई और आपसी राजीनामें से 800 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण हुआ।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद के सचिव, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश श्री मनीष कुमार वैष्णव ने बताया कि इस वर्ष की चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालय परिसर में लोक अदालत बैंचों के समक्ष पक्षकार उपस्थित हुए आपसी झगड़े एवं बैर को मिटाकर राजीनामा से मामले का निस्तारण करवाकर खुषी-खुषी अपने घर गए। जिलेभर में गठित की गई कुल 11 बैंचों के समक्ष लंबित प्रकरणों में समझाइश के पश्चात् 800 से अधिक प्रकरणों में पक्षकारों के मध्य सहमति बनी।
बैंच के समक्ष प्रस्तुत एक मामले में चार भाइयों के मध्य बंटवारे के विवाद को सभी भाइयों ने आपसी समझाईष से राजीनामा कर निस्तारण करवाया और न्यायालय से राजीनामा कर निस्तारण करवाकर शीघ्र न्याय प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि लोक अदालत में निस्तारित प्रकरणों में दोनों ही पक्षों की जीत होती है ऐसे प्रकरणों की अपील भी नहीं होती और दोनों पक्षों के बीच आपसी प्रेम और सौहार्दभाव बना रहता है। पक्षकारों को न्यायालय फीस भी पुनः प्रदान कर दी जाती है।
लोक अदालत में विभिन्न राजकीय विभागों यथा विद्युत विभाग, जलदाय विभाग, टेलीफोन विभाग तथा विभिन्न बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, राजस्थान मरूधरा ग्रामीण बैंक केलवा, कांकरोली इत्यादि के प्रतिनिधि समस्त रिकॉर्ड लेकर उपस्थित रहे और राजीनामा के मामलों में सक्रिय सहयोग किया।
जिला मुख्यालय पर गठित 04 बैंचों के अध्यक्ष श्री संतोष कुमार मित्तल न्यायाधीष, पारिवारिक न्यायालय, श्री मनीष कुमार वैष्णव, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रीमती ऋचा चायल अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्रीमती मीनाक्षी अमित चौधरी विषिष्ट न्यायाधीष एनआई एक्ट राजसमंद व बैंच के सदस्यगण उपस्थित रहे।