राधा रानी ब्रजयात्रा ने आदि बद्री क्षेत्र के दिव्य पर्वतों का दर्शन किया
डीग, जिन दुरूह लीला स्थलों का दर्शन कोई नहीं करता उन्हीं का दर्शन सौभाग्यवश् ब्रज के विरक्त संत पद्मश्री रमेश बाबाजी की महती अनुकंपा से राधा रानी ब्रज यात्रा के 10000 से अधिक यात्री करके अपने सौभाग्य को सराह रहे हैं । बाबा महाराज ने चैतन्य महा प्रभु वज्रनाभ जी नारायण भट्ट जैसे महा पुरुषों की भाँति ब्रज के अनेक दिव्य लीला स्थलों की खोज की और उनकी स्थापना की । ये सभी लीला स्थली भी दुर्दांत खनन माफ़ियों की भैट चढ़ जाती परंतु बाबा ने जान हथेली पर रख कर इनकी रक्षा कर सदा सदा के लिये सुरक्षित कर दिया और सभी खनन माफिया यहाँ से भागने को मजबूर हो गये।
खोह गाँव में रास के मध्य अंतर्धान हुए भगवान कृष्ण को खोजने को समस्त गोपियाँ राधा रानी के साथ इन सभी पर्वतों में विरहव्यथित दशा में घूमती रहीं थीं। यात्रियों ने रोहिताचल पर्वत ,नर पर्वत ,नारायण पर्वत ,त्रिकूट पर्वत ,मैनाक पर्वत,विंध्याचल पर्वत ,गंध मादन पर्वत ,धवल गिरि पर्वत ,द्रोण गिरि पर्वत ,यमुनोत्री गंगोत्री लक्ष्मण झूला ,देव सरोवर ,हिरण खोई ,हरि की पौढ़ी,हरिद्वार चंदन वन दर्शन करते हुए भगवान आदि बद्रि भगवान के दर्शन किए । बाबा बार नरसिंह दास ,सुनील सिंह ,राधा कान्त शास्त्री आदि बद्रि के महंत शिवराम दास आदि ने सभी गूढ़ लीला स्थलों का दर्शन कराया ।